‘2002 के बाद 2.78 करोड़ नये नाम वोटर लिस्ट में जुड़े’

पश्चिम बंगाल में करीब 23 वर्ष पहले 2002 में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) हुआ था.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में करीब 23 वर्ष पहले 2002 में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) हुआ था. अब चुनाव आयोग ने बंगाल में फिर से एसआइआर लागू करने की कवायद शुरू की है. हालांकि, इसे लेकर प्रदेश भाजपा के महासचिव जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य के वर्तमान मतदाता सूची में दो करोड़ 78 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जिनके नाम 2002 की सूची में नहीं थे. अर्थात वे वर्ष पिछले 22 वर्ष में राज्य में नये मतदाता बने हैं. श्री चट्टोपाध्याय ने दावा करते हुए कि मौजूदा मतदाता सूची से 2002 के वोटर लिस्ट का मिलान कर देखा गया है कि इसमें 2002 के केवल 45 प्रतिशत मतदाताओं के नाम शामिल हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 20-22 वर्षों में सिर्फ उत्तर 24 परगना में 55 प्रतिशत नये मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किये गये हैं. उन्होंने कहा कि महानगर से सटे साल्टलेक इलाके में भी सड़कों व खालों के किनारे रोहिंग्या बस्तियां बसायी गयी हैं और राज्य सरकार ने उनके वोटर कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, सब कुछ बना दिया है. अब उनकी पहचान इसी एसआइआर के जरिये होगी, क्योंकि पश्चिम बंगाल कोई धर्मशाला नहीं है. उन्होंने कहा कि शरणार्थियों को भारत में आश्रय मिलेगा, लेकिन अवैध घुसपैठियों को वापस भेजा जायेगा. उत्तर बंगाल में आयी बाढ़ के बारे में उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल में राहत कार्य के लिए राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा अब तक एक पैसा भी आवंटित नहीं किया गया है. इतनी बड़ी आपदा के बावजूद राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा कोई मदद नहीं की गयी. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के सांसद, विधायक, नेता और मंत्री उत्तर बंगाल के लोगों को राहत सामग्री देने गये थे, लेकिन तृणमूल के इन अवैध घुसपैठिये समर्थकों ने भाजपा नेताओं पर हमला कर दिया. उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि पुलिस द्वारा घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों की गिरफ्तारियां नहीं की जा रही है.

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Published by: Sandip tiwari

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