खड़गपुर : पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिले में गुरुवार को दोनों जिले के लोगों ने पुराण और विज्ञान के असमंजस में फंस कर सूर्य ग्रहण को देखा. पुरानी पीढ़ी के बुजुर्गों का सूर्य ग्रहण के दौरान देव- देवी का अर्चना सहारा और पूजास्थल ठिकाना बना.
वहीं नयी और युवा पीढ़ी ने रुढ़िवादी बातों को दरकिनार करते हुए काला चश्मा पहन कर सूर्य ग्रहण को देखा. गौरतलब है कि भारत में गुरुवार की सुबह आठ बजे सूर्य ग्रहण लगा और दोपहर 1.36 बजे खत्म हुआ.
पुराणों को माननेवाले बुजुर्गों ने सूर्य ग्रहण शुरू होने से पहले ही खा लिया था. ग्रहण के दौरान बुजुर्ग उपवास पर रहे. घरों में रखे अनाज, दूध-दही, जल में तुलसी के पत्तों को रखा गया. इसके साथ ही मंत्रों का जाप व घर में पूजा-अर्चना की गयी. सूर्य ग्रहण खत्म होते घरों की साफ-सफाई के बाद कुछ बुजुर्गों को नदी, खाल और तालाबों में स्नान करते हुए देखा गया.
स्नान के बाद लोगों ने दान भी किया. वहीं, विज्ञान को माननेवाले युवा वर्ग को सूर्य ग्रहण के दौरान काफी उत्सुक देखा गया. युवाओं ने ग्रहण देखने के लिए आंखों पर काला चश्मा पहन रखा था. पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिले के कई स्थानों पर युवाओं को सूर्य ग्रहण का लुप्त उठाते हुए देखा गया. सूर्य ग्रहण के दौरान भी युवा वर्ग खाने-पीने से परहेज नहीं कर रहे थे.
गौरतलब है कि यह खगोलीय घटना इसलिए भी ज्यादा रोमांचक रही, क्योंकि यह सूर्यग्रहण लगभग 296 वर्षों के बाद हुआ. सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य का लगभग 44.11 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा द्वारा ढक लिया. वहीं, सौर व रिफ्लेक्शन दूरबीनों पर फिल्टर लगाकर खड़गपुर शहर के जन कल्याण स्कूल में विधार्थियों को सूर्य ग्रहण दिखाया गया.
