कोलकाता : राज्य के पर्यावरण विभाग ने सिर्फ कुछ निर्देश जारी करने के अलावा प्रदूषण कम करने के लिए कोई कार्य ही नहीं किया. केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गये किसी भी गाइडलाइन को अब तक क्रियान्वित नहीं किया गया है. इसे देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने नाराजगी व्यक्त की है.
कोलकाता व हावड़ा शहर में प्रदूषण कम करने के लिए राज्य सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है. नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने राज्य सरकार पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और यह राशि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के पास जमा करने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायाधीश एसवी वांगदी व विशेषज्ञ सदस्य एसएस गरबियाल की खंडपीठ ने दिया है. इस मामले के पहले भी ट्राइब्यूनल ने राज्य सरकार को पांच करोड़ रुपये अंतरिम क्षतिपूर्ति के लिए जमा करने को कहा था.
क्या है मामला
जानकारी के अनुसार, पर्यावरण की रक्षा के लिए अदालत ने विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया था. विशेषज्ञ कमेटी की सिफारिशों को मानते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने क्या-क्या कदम उठाये हैं, इस संबंध में राज्य के पर्यावरण विभाग की ओर से ट्राइब्यूनल में रिपोर्ट जमा की गयी थी. रिपाेर्ट की जांच करने पर पता चला कि अधिकांश क्षेत्रों में राज्य सरकार ने सिर्फ निर्देशिका जारी की है, जमीनी स्तर पर निर्देशों का पालन नहीं हुआ है.
विशेषज्ञ कमेटी ने कोलकाता व हावड़ा शहर में 15 वर्ष पुराने वाणिज्यिक वाहनों को बंद करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इसे पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है. इसके साथ ही विशेषज्ञ कमेटी ने कोलकाता व हावड़ा शहर में बीएस-4 तकनीक से बने बसों को चलाने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार ने इसके जवाब में कहा है कि परिवहन विभाग के अधीनस्थ परिवहन निगम की कंपनियों को इसे लागू करने का निर्देश जारी किया गया है और इस ओर तेजी से कार्य हो रहा है.
