ईस्ट-वेस्ट मेट्रो. ड्राउटिंग पद्धति से जलस्तर नियंत्रित करने का हो रहा प्रयास
कोलकाता : काफी तेजी से चल रही ईस्ट-वेस्ट परियोजना पर अचानक किसी की नजर लग गयी. विशेषज्ञों की माने तो परियोजना कम से कम एक साल और पीछे चली गयी है. ईस्ट-वेस्ट परियोजना से जुड़े इंजीनियरों की माने तो 2021 तक यह परियोजना किसी भी हाल में अब शुरू नहीं हो सकती है. विशेषज्ञों की माने को कोलकाता के अंदर की मिट्टी का कटाव हुगली में हो रहा है. जमीन के अंदर मिट्टी के कटाव के कारण ही कोलकाता शहर के कुछ स्थानों की जमीन के अंदर खोखला हुआ है.
ऐसे में धंसान हो रहा है. एस्प्लेनेड और सियालदह के मध्य बऊबाजार के पास जमीन के अंदर सुरंग में खुदाई का काम हो रहा है. अर्थ टनल बोरिंग मशीन (एटीवीएम) ज्योंहि बऊबाजार के पास सुरंग के अंदर खुदाई का काम शुरू की धंसान होने लगा. एक के बाद एक मकान धंसने लगे. जमीन के ऊपर कई मकानों की नींव हिल गयी. आज स्थिति यह है कि सुरंग के अंदर जहां अर्थ टनल बोरिंग मशीन (एटीवीएम) काम कर रही थी, वहां वर्तमान में पहुंचना मुश्किल हो रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जमीन के अंदर जलस्तर को कम नहीं किया जायेगा तब तक ऐसा धंसान होता रहेगा. मेट्रो प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि सुरंग के रास्ते में पड़नेवाली जमीन के अंदर जलस्तर को कैसे कम किया जाये. वर्तमान में अर्थ टनल बोरिंग मशीन (एटीवीएम) से सुरंग की खुदाई पर रोक लगा दी गयी है. सुरंग के अंदर रिस रहे पानी को रोकने के लिए एस्पलेनेड की तरफ कंक्रीट और लोहा का इस्तेमाल करते हुए एक मोटी दीवार खड़ी कर सुरंग का मुंह बंद दर दिया गया है. सुरंग में हो रहे रिसाव को रोकने के लिए सुरंग के आपपास की जमीन में सीमेंट की ड्राउटिंग पद्धति का इस्तेमाल हो रहा है.
ड्राउटिंग पद्धति में बालू, सीमेंट और पेट्रोनाइट के साथ कुछ रासायनिक को पंप की सहायता से सुरंग में भी डाला जा रहा है. सियालदह से लेकर एस्प्लेनेड स्टेशन के मध्य करीब 22 स्थानों पर पंप की सहायता से ड्राउंटिंग का कार्य हो रहा है, लेकिन प्रश्न यह उठ रहा है कि मेट्रो परियोजना के बहूबाजार इलाके में पहुंचते ही ऐसा क्या हुआ कि धंसान शुरू हो गया? क्या इस हादसे का अंदाजा परियोजना के इंजीनियर्स नहीं लगा पाये थे ? ईस्ट-वेस्ट परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले बहूबाजार के नीचे की जमीन की मिट्टी की समीक्षा की गयी थी. उस वक्त मिट्टी के अंदर इस तरह का जलस्तर नहीं था, लेकिन अचानक जमीन के अंदर मिट्टी में जल स्तर बढ़ा है.
