कहा : रोहिंग्या मुसलमान बन गये हैं अपने, बंगाल का विकास करनेवाले हो गये हैं बाहरी
कोलकाता : प्रदेश भाजपा के केंद्रीय प्रभारी व भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि डॉक्टरों का आंदोलन ममता जी के तुष्टीकरण की नीति का दुष्परिणाम है. श्री विजयवर्गीय ने शुक्रवार को प्रभात खबर से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री आंदोलन करनेवाले छात्रों को बाहरी करार दे रही हैं, क्योंकि जूनियर डॉक्टरों को मारने वाले तृणमूल कांग्रेस के लोग हैं. वे उनके मतदाता हैं. इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
जूनियर डॉक्टर आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं. यह भी ममताजी की तुष्टीकरण की नीति का ही दुष्परिणाम है. श्री विजयवर्गीय ने कहा : मुख्यंमत्री जी आप प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री भी हैं. आपके अहंकार के कारण पिछले चार दिनों में कितने लोगों ने मौत का दरवाजा खटखटाया है. कुछ तो शर्म करो
उन्होंने कहा : बंगाल की केवल स्वास्थ्य व्यवस्था ही नहीं चरमरा गयी है, वरन राज्य की कानून-व्यवस्था भी बुरी तरह से बिगड़ गयी है. राज्य में कहीं न कहीं प्रत्येक दिन हिंसा की घटनाएं हो रही हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है. भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले किये जा रहे हैं. उन्हें परेशान किया जा रहा है.
उन्होंने कहा : रामचरित मानस में कहा गया है कि जब राजा को अहंकार हो जाता है, तो फिर वह राज्य लंका के समान हो जाता है. फिर कोई राम का प्रादुर्भाव होता है और वह अहंकार को समाप्त करने आता और अंहकार नष्ट कर रामराज की स्थापना करता है. आज ममता अहंकारी राजा बन गयी हैं. ममता जी के नेतृत्व में पूरे राज्य में अराजकता का साम्राज्य है. यहां रामराज की जरूरत है. बंगाल में रामराज केवल भाजपा ही ला सकती है और राज्य की जनता ने भी अब अपना मन बना लिया है और विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में रामराज आयेगा. यह पूछे जाने पर कि सुश्री बनर्जी का आरोप है कि राज्य में अशांति बाहर को लोग फैला रहे हैं. अस्पतालों में हड़ताल करने में जूनियर डॉक्टरों को उकसाने वाले भी बाहर के ही लोग हैं.
श्री विजयवर्गीय ने कहा : मुझे अफसोस होता है कि ममताजी रोहिंग्या मुसलमानों को अपना रिश्तेदार मानती हैं. जो घुसपैठिये आ रहे हैं, प्रदेश के अंदर, तो क्या उससे प्रदेश का विकास हो रहा है. दु:ख इसी बात का है, जो बाहरी हैं, इस प्रदेश को नुकसान पहुंचा रहे हैं. प्रदेश में आरजाकता फैला रहे हैं, हिंसा फैला रहे हैं.
वो ममता जी के अपने हो गये हैं. ये सिर्फ उनकी तुष्टीकरण की मानसिकता के कारण है, जो बंगाल के विकास के लिए बाहर से आकर उद्योग डाल रहे हैं और उद्योगों में काम कर रहे हैं.वे बाहरी हो गये. ये बंगाल को विभाजित करने वाली भाषा ममता जी को बहुत महंगी पड़ेगी.
