कोलकाता : अक्सर हम सभी सुनते या पढ़ते हैं कि पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए धारा-144 लगा दी है. कहीं भी किसी भी शहर में हालात बिगड़ने की संभावना या किसी घटना के बाद धारा-144 लगा दी जाती है.
जिस जगह भी यह धारा लगायी जाती है, वहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते. लेकिन फिलहाल कोलकाता या आस-पास के इलाकों में ऐसी स्थिति पैदा नहीं हुई है, जिससे धारा 144 लगाना पड़े.
लेकिन इन दिनों हावड़ा स्थित एक होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल एक मात्र ऐसा अस्पताल है, जहां धारा 144 लगने जैसा माहौल है. यहां एक विभाग के शिक्षक चिकित्सक दूसरे किसी विभाग के शिक्षकों के साथ मिल कर चाय भी नहीं पी सकते.
यह तुगलकी फरमान हावड़ा स्थित निताई चरण चक्रवर्ती होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल द्वारा जारी किया गया है. कॉलेज प्रबंधन ने शिक्षक चिकित्सकों एक साथ चाय पीने पर रोक लगा दी है, जो केवल प्रोफेसर डॉक्टरों के लिए जारी किया गया है.
कॉलेज प्रबंधन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि डॉक्टर अपने विभाग में चिकित्सक को छोड़ कर दूसरे किसी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों के साथ चाय नहीं पी सकेंगे. दिशा-निर्देशों को सख्ती से पालन करने के निर्देश दिये गये हैं. टी पार्टी पर रोक लगाने के लिए गत 12 मार्च कॉलेज प्रबंधन की ओर से नोटिस जारी किया गया है.
क्या है मामला
मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ सुजय पलित जिन्हें अब कॉलेज से बर्खास्त कर दिया गया है. डॉ पलित ने बताया कि अस्पताल सब कुछ ठीक नहीं चला रहा है.
प्रबंधन इन्हीं गड़बड़ी को उजागर करने के लिए विभाग में ही एक छोटे से कमरे में चाय के साथ चिकित्सक चर्चा करते थे. अस्पताल के विभिन्न विषयों पर चर्चा होती थी.
इस टी पार्टी में अन्य विभाग के चिकित्सक भी शामिल होने लगे. इस बीच उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. उन पर आरोप है कि वे जांच किये बगैर कॉलेज से संबंधित कुछ आपत्तिजनक पोस्ट फेसबुक पर डाले थे. जिसके कारण उन्हें गत वर्ष मेडिकल कॉलेज से बर्खास्त कर दिया गया.
डॉ पलित ने बताया कि हावड़ा इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीन पर कॉलेज प्रबंधन ने अवैध रुप से कब्जा कर लिया है. प्रबंधन के कामकाज में स्वच्छता का अभाव है. ऐसे कई विषय पर आवाज उठाने के कारण मुझे बर्खास्त कर दिया गया है.
