कोलकाता : राज्य में आलू की कीमतें कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. बाजार में ज्योति आलू की कीमत करीब 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गयी है. वर्ष की शुरुआत से इसकी कीमतों में आयी तेजी अब तक जारी है. आलू का एक बड़ा हिस्सा राज्य के हिमघरों में चला जा रहा है. राज्य में आलू की औसत पैदावार 90 से 95 लाख मैट्रिक टन है.
वर्ष भर राज्य में मांग करीब 60 मैट्रिक टन की रहती है. यानी उत्पादन व मांग में फर्क करीब 30 लाख मैट्रिक टन का है. व्यवसाय के सामान्य नियम के तहत यदि मांग की तुलना में उत्पादन अधिक होता है, तो कीमत कम होनी चाहिए. लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ. इसका कारण है कि फरवरी व मार्च में दो चरणों में बारिश से जिलों के आलू की पैदावार को नुकसान हुआ है.
आलू के पूरी तरह तैयार होने में करीब 48 दिनों का समय लगता है. इस वर्ष समय केवल 22 से 25 दिनों का मिला है. लिहाजा आलू का आकार छोटा हुआ है. हुगली में 2012-13 में आलू की पैदावार 27 लाख मैट्रिक टन हुई थी, वहीं 2013-14 में यह 16 लाख मैट्रिक टन हुआ. गत वर्ष आलू की कीमतों को काबू में करने के लिए राज्य सरकार की ओर से आलू के दूसरे राज्य में निर्यात पर पाबंदी लगायी गयी थी. लेकिन इस बार व्यवसायी राज्य के हिमघरों में आलू को रखने के पहले इसे दूसरे राज्यों में भेज रहे हैं. बारिश की वजह से बंगाल के अलावा बिहार, झारखंड, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भी आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है.
