खुदकुशी से पहले पूर्व आइपीएस अधिकारी ने पत्र में बयां किया था दर्द

राज्य पुलिस ने सभी आरोपों का किया खंडन कोलकाता : सॉल्टलेक में हाल ही में एक रिटायर्ड आइपीएस अधिकारी गौरव चंद्र दत्ता ने हाथ की कलाई की नली काट कर खुदकुशी कर ली थी. इसके पहले उन्होंने ईमेल के जरिये कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजा था, जो शुक्रवार को सामने आया. शुक्रवार को जब […]

राज्य पुलिस ने सभी आरोपों का किया खंडन

कोलकाता : सॉल्टलेक में हाल ही में एक रिटायर्ड आइपीएस अधिकारी गौरव चंद्र दत्ता ने हाथ की कलाई की नली काट कर खुदकुशी कर ली थी. इसके पहले उन्होंने ईमेल के जरिये कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजा था, जो शुक्रवार को सामने आया. शुक्रवार को जब यह पत्र वायरल हुआ तो कुछ लोग अचंभित हो गये. उन्होंने अपनी आत्महत्या के लिए दिल में वर्षों से दबे दु:ख व दर्द को शब्दों में बयां किया है. साथ ही कुछ आइपीएस अधिकारियों के दर्द को भी अपने पत्र में जिक्र किया है.
उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार ने अपनी मर्जी से इस्तेमाल किया और काम निकल जाने पर उन्हें विवादों में फंसा कर सस्पेंड करवा दिया. इसके बाद 2011 से उन्हें अनिवार्य प्रतीक्षा की श्रेणी में रखा गया था. यही नहीं, उनकी तनख्वाह भी रोक दी गयी. पत्नी के इलाज के लिए रुपये के लिए वह तड़पते रहे. उनकी पोस्टिंग तक रोक दी गयी. एक इससे वह मानसिक रूप से इतने परेशान हुए कि आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा.
उन्हो‍ंने लिखा, ‘जितने भी आइपीएस अधिकारी काम कर रहे हैं, जो किसी भी पार्टी की क्यों ना सरकार हो, वे सत्तारूढ़ पार्टी को संतुष्ट करने के लिए कानून के दायरे में रहकर काम नहीं कर रहे हैं, उन सभी के लिए मैं कहना चाहता हूं कि आप सरकार के लिए केवल यूज एंड थ्रो करने का एक मोहरा मात्र हैं. आपके इस्तेमाल के बाद आपको दूर कर दिया जायेगा. भले आज आप सत्ता के करीब हैं, लेकिन कल खुद को दूर पायेंगे.’
वहीं इस पत्र में लगाये गये आरोप पर राज्य पुलिस की तरफ से कहा गया कि जिन आरोपों का पत्र में जिक्र किया गया है, सभी निराधार है. रिटायर्ड अधिकारी गौरव चंद्र दत्ता जब तक कार्यक्षेत्र में थे, तब तक उन्हें एक लाख 99 हजार रुपये तनख्वाह दिया जाता था. जब वे रिटायर हुए तब वे एक लाख चार हजार रुपये तनख्वाह पाते थे. लिहाजा आरोपों का कोई आधार नहीं है.

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