बंगाल में नवजात केयर की सबसे अधिक इकाइयां : ममता

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि देश में नवजात शिशुओं की देखभाल और बेहतर इलाज के लिए सबसे अधिक बिस्तर और सुविधाएं पश्चिम बंगाल में हैं. ‘नवजात देखभाल सप्ताह’ (न्यूबॉर्न केयर वीक) की शुरुआत के दौरान उन्होंने यह बयान दिया. ममता ने ट्विटर पर लिखा, ‘नवजात देखभाल सप्ताह’ आज से शुरू हो […]

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि देश में नवजात शिशुओं की देखभाल और बेहतर इलाज के लिए सबसे अधिक बिस्तर और सुविधाएं पश्चिम बंगाल में हैं. ‘नवजात देखभाल सप्ताह’ (न्यूबॉर्न केयर वीक) की शुरुआत के दौरान उन्होंने यह बयान दिया. ममता ने ट्विटर पर लिखा, ‘नवजात देखभाल सप्ताह’ आज से शुरू हो गया है.
हमने पिछले सात वर्षों में बंगाल में 307 ‘सिक न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट’ (एसएनएसयू) की स्थापना की है. ‘सिक नियोनेटल केयर यूनिट’ (एसएनसीयू) की संख्या छह से बढ़कर 68 हो गई है.’ ‘नवजात देखभाल सप्ताह’ हर वर्ष 15 से 21 नवम्बर के बीच, नवजात देखभाल के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नवजात देखभाल सप्ताह के शुरुआत में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में नवजातों की देखरेख के लिए सबसे अधिक क्रिटिकल केयर यूनिट और बेड उपलब्ध है. यह तृणमूल सरकार के कार्यों का ही परिणाम है कि आज पश्चिम बंगाल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए क्रिटिकल केयर यूनिट और बेड की संख्या पूरे देश में सबसे अधिक है.
उल्लेखनीय है कि देशभर में नवजात देखभाल सप्ताह 15 से 21 नवंबर तक मनाया जाता है. इसका मूल लक्ष्य नवजात बच्चों के इलाज और देखभाल के प्रति जागरुकता तथा चिकित्सकीय इकाइयों का विकास है. जन्म के बाद 28 दिनों तक बच्चों की जिंदगी को सबसे अधिक खतरा रहता है. इसलिए अस्पताल में बच्चों के लिए सीक नियोनेटल पीरियड यूनिट की स्थापना की गयी है, जिसमें जन्म के बाद बच्चों को रखकर इलाज किया जाता है.
28 दिनों तक इसमें रहने के बाद बच्चे अगर स्वस्थ रहते हैं तो उन्हें निकाल कर क्रिटिकल केयर यूनिट में शिफ्ट किया जाता है. आंकड़े बताते हैं कि जन्म से 28 दिनों के अंदर प्रतिवर्ष 26 लाख बच्चों की मौत दुनिया भर में होती है. 2035 तक इसे घटाकर 1000 करने के लक्ष्य के साथ नवजात देखभाल सप्ताह की शुरुआत की गई है. इसके तहत मूल रूप से अस्पतालों में नवजात बच्चों के इलाज से संबंधित व्यवस्थाएं विकसित की जाती हैं.

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