कोलकाता : मछली को लेकर बंगाल में आतंक, सेहत के लिए नुकसानदेह है फारमोलिन

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के लोगों की थाली में एक बार फिर दहशत की छाया दिख रही है. इस बार मामला मछली को लेकर है. बंगाल के लोगों का मछली प्रेम जगजाहिर है. लेकिन इसी मछली को लेकर लोग अब संशय में पड़ गये हैं. मिली खबर के अनुसार बंगाल में बाहर से आने वाली […]

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के लोगों की थाली में एक बार फिर दहशत की छाया दिख रही है. इस बार मामला मछली को लेकर है. बंगाल के लोगों का मछली प्रेम जगजाहिर है. लेकिन इसी मछली को लेकर लोग अब संशय में पड़ गये हैं.
मिली खबर के अनुसार बंगाल में बाहर से आने वाली ज्यादातर मछलियों में फारमोलिन जैसे कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है जो इंसान के लिए नुकसानदेह है. एेसे में स्वास्थ के प्रति सचेत रहने वाले लोगों के लिए यह खबर चिंता का कारण बन गयी है. मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा मछली आंध्र प्रदेश से आती है, और वहां से आने वाली मछलियों को ताजी रखने के लिए व्यापारी फारमोलिन नामक रसायन का प्रयोग करते हैं.
यह मामला अब आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम व पश्चिम बंगाल की सरकारों के लिए चिंता का कारण बन गया है. आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि वे ताजी मछलियां भेजते हैं. मिलावट का कारोबार पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में होता है. हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इस तरह के आरोपों को खारिज किया जा रहा है.
ल्लेखनीय है कि बीते कुछ महीनों से भगाड़ के सड़े मांस की खबर से बंगाल के लोग दहशत में थे. लोगों ने एक तरह से मांस से तौबा ही कर लिया था. उसके पहले प्लास्टिक के अंडे की खबर से लोग दहशत में थे. लोग अभी इन खबरों से उबर ही रहे थे कि इसी बीच फारमोलिन युक्त मछली की खबर से लोग एक बार फिर दहशत में आ गये हैं.
क्योंकि यह इंसान के लिए काफी घातक होता है. खबर तब उभर कर सामने आयी जब असम सरकार ने आंध्र प्रदेश से आने वाली मछलियों को अपने यहां 10 दिनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया. उनका आरोप है कि इसमें फारमोलिन का उपयोग किया जा रहा है. यह शरीर के लिए बहुत घातक है. इसके बाद ओडिशा सरकार हरकत में आयी और उसने अपने यहां जांच तेज कर दी. इसके लिए वह प्रयोगशालाओं का सहारा लेने के साथ-साथ जांच एजेंसियों को भी इसमें लगा दिया है.
क्योंकि आंध्र प्रदेश से आने वाली मछलियां ओडिशा होते हुए बंगाल आती हैं. फिलहाल ओडिशा में इस तरह की कोई घटना अभी तक सामने नहीं आयी है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार हरकत में आयी है और उसने इस मामले को अपने अधिकारी राजशंकर के हवाले कर दिया. उनका दावा है कि उनके प्रदेश के व्यापारी यहां से ताजी मछलियां ही भेजते हैं. यहां पर किसी भी तरह की मिलावट की गुंजाइश नहीं है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ व्यापारियों ने बताया कि यह सारा गोरखधंधा पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में कहीं रात के अंधकार में होता है.
वहीं से फिर बची हुई मछली असम और अन्य जगहों पर खपाई जाती है. हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार पिछले कई दिनों से लोगों के खाने के सामानों में किसी तरह की मिलावट के खिलाफ अभियान चला रही है. कई स्थानों पर छापे भी मारे जा चुके हैं.
इंसान के शरीर में अगर 0.2 फीसदी फारमोलिन भी चला गया तो वह काफी घातक होता है. अगर इसका लगातार प्रयोग होता रहा तो वह व्यक्ति कई कई रोगों की चपेट में आ सकता है. हालांकि अभी तक पश्चिम बंगाल सरकार ने अभी तक मछलियों की आमद पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगायी है लेकिन वह मामले को गंभीरता से ले रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >