West Bengal Election 2026 Phase 1 Voting Percentage: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया. निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 16 जिलों में जबर्दस्त वोटिंग हुई. उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक, लोगों में मतदान को लेकर भारी उत्साह देखा गया. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा कूचबिहार से आया, जहां रिकॉर्ड 96.2 प्रतिशत मतदान हुआ. राज्य के कुल 3.60 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 3.36 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है.
कलिम्पोंग में हुई सबसे कम वोटिंग
चुनाव आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मतदान का स्तर बेहद ऊंचा रहा. उत्तर बंगाल के कूचबिहार के बाद दक्षिण दिनाजपुर वोटिंग के मामले में दूसरे नंबर पर रहा. यहां 95.44 प्रतिशत और मालदा में 94.79 फीसदी मतदान हुआ. जलपाईगुड़ी में 94.76 प्रतिशत, उत्तर दिनाजपुर में 94.16 फीसदी और बीरभूम में 94.51 प्रतिशत वोटिंग हुई.
पहाड़ पर सबसे कम मतदान
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाके दार्जिलिंग में 88.98 फीसदी मतदान हुआ. कलिम्पोंग जिला 83.04 प्रतिशत मतदान के साथ लिस्ट में सबसे नीचे रहा. दक्षिण बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में 92.75 फीसदी, पश्चिम मेदिनीपुर में 92.19 प्रतिशत और झारग्राम में 92.26 प्रतिशत वोटिंग हुई.
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पुरुष और महिला मतदाताओं में कड़ी टक्कर
बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण के महाकुंभ में वोटरों की भागीदारी ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये. इस चरण में कुल 3,60,77,304 पंजीकृत वोटर थे. इनमें से 3,36,22,168 लोगों ने ईवीएम का बटन दबाया. 1,70,81,849 पुरुषों और 1,65,40,065 महिलाओं ने वोट डाले. महिलाओं की यह भारी भागीदारी राज्य में सत्ता की चाबी किसके पास जायेगी, इसमें बड़ी भूमिका निभा सकती है.
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West Bengal Election 2026 Phase 1 Voting Percentage: मतदान प्रतिशत की पूरी लिस्ट (जिलावार)
| जिले का नाम | वोट प्रतिशत |
|---|---|
| कूचबिहार | 96.2 प्रतिशत |
| दक्षिण दिनाजपुर | 95.44 प्रतिशत |
| मालदा | 94.79 प्रतिशत |
| जलपाईगुड़ी | 94.76 प्रतिशत |
| बीरभूम | 94.51 प्रतिशत |
| उत्तर दिनाजपुर | 94.16 प्रतिशत |
| मुर्शिदाबाद | 93.67 प्रतिशत |
| अलीपुरदुआर | 93.2 प्रतिशत |
| पूर्व मेदिनीपुर | 92.75 प्रतिशत |
| झारग्राम | 92.26 प्रतिशत |
| पश्चिम मेदिनीपुर | 92.19 प्रतिशत |
| बांकुड़ा | 92.55 प्रतिशत |
| पुरुलिया | 91.59 प्रतिशत |
| पश्चिम बर्धमान | 90.32 प्रतिशत |
| दार्जिलिंग | 88.98 प्रतिशत |
| कलिम्पोंग | 83.04 प्रतिशत |
किसका रास्ता हुआ साफ, फैसला 4 मई को
इतने उच्च मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है. भारी मतदान को अक्सर ‘परिवर्तन’ की लहर या फिर मौजूदा सरकार के प्रति ‘मजबूत समर्थन’ के रूप में देखा जाता है. अब 4 मई को होने वाली मतगणना ही बतायेगी कि इस ‘वोटों की सुनामी’ ने किसका रास्ता साफ किया और किसकी मुश्किलें बढ़ायी हैं.
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