कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि विकास की गति को तेज करने और योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए विभागीय खर्चों में कटौती करनी होगी. उन्होंने कहा कि अति सक्रिय (प्रो एक्टिव) हो कर हमें फिजूलखर्ची बंद करनी होगी.
राज्य सचिवालय नवान्न भवन में खर्चों में कमी लाने के मुद्दे पर आयोजित प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री कहा : वर्ष 2011 में सत्ता में आने के बाद से ही राज्य सरकार ने सक्रिय रूप से कार्य किया है. जिसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है. लेकिन अब हमें प्रो-एक्टिव (अति सक्रिय) होना होगा. राज्य पर पहले से ही वाम मोरचा के कार्यकाल के दौरान लिये गये कर्ज का बोझ है. इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा कई सामाजिक योजनाएं जैसे कन्याश्री, शिक्षाश्री, सबूज साथी, खाद्य साथी आदि का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है. लेकिन अब समय आ गया है कि हमें फिजूलखर्ची बंद करनी होगी.
ताकि विकास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रभावित न हों.
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल की उपेक्षा कर रही है. एक ओर, यहां की योजनाओं को राशि नहीं दी जा रही और दूसरी ओर वाम मोरचा कार्यकाल के दौरान लिये गये ऋण को वसूलने के लिए 46000 करोड़ रुपये काट लिये जा रहे हैं. आर्थिक तंगी होने के बावजूद राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा की योजनाआें का क्रियान्वयन कर रही है. मुख्यमंत्री ने सचिवों को हिदायत देते हुए कहा कि सरकार का पैसा, जनता का पैसा है.
यह किसी की विलासिता के लिए नहीं है. कई बार गलत निविदा के कारण सरकार का पैसा बर्बाद होता है. इस प्रकार की त्रुटियां आगे से नहीं होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने मंत्रियों को भी कहा कि कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग है. वह अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग वाहन का प्रयोग करते हैं. ऐसा नहीं चलेगा. सरकारी कार्यक्रमों में होनेवाले खर्च को भी कम करना होगा. सरकारी कार्यक्रम सादे तरीके से आयोजित करने होंगे.
पश्चिम बंगाल सरकार ने विभिन्न विभागों में फिजूलखर्ची में कटौती के लिए राज्य के अधिकारियों के दिल्ली एवं अन्य राज्यों के लगातार दौरे, सितारा होटलों में कॉन्फ्रेंस एवं बैठकें नहीं करने का निर्देश दिया है. सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन सरकारी भवन में ही करना होगा. साथ ही किसी भी सरकारी कार्यक्रम में खर्चों को कम करने के लिए कई निर्देश दिये गये हैं, जिसमें बैठक स्थलों की साज-सज्जा पर न्यूनतम खर्च एवं सादे भोजन के पैकेट दिए जाने की बात कही गयी है.
नये पदों के सृजन, नये वाहनों की खरीद और महंगे उपहार देने पर भी रोक लगायी गयी है. यहां तक कि मेहमानों को जो फूलों का गुलदस्ता दिया जाता है, उसे और भी छोटा करना होगा. साथ ही मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में अंग वस्त्र प्रदान करने की प्रथा को बंद करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि यह पैसे की बरबादी है, क्योंकि यह किसी के कोई काम नहीं आता.
बैठक में राज्य के वित्त मंत्री डॉ अमित मित्रा, शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम, ग्रामीण विकास व पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी, उपभोक्ता सुरक्षा मंत्री साधन पांडे व मुख्य सचिव मलय कुमार दे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे.
सीएम के सुझाव
कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग हैं. वह अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग वाहन का प्रयोग करते हैं. अब ऐसा नहीं होगा.
सरकारी कार्यक्रम सादे तरीके से आयोजित करने होंगेसरकारी कार्यक्रमों का आयोजन सरकारी भवन में ही करना होगाबैठक स्थलों की साज-सज्जा पर न्यूनतम खर्च एवं सादे भोजन के पैकेट दिये जायेंमेहमानों को दिया जाने वाला गुलदस्ता छोटा करना होगाअंग वस्त्र प्रदान करने की प्रथा को बंद कर देना चाहिए, यह पैसे की बरबादी है, क्योंकि यह किसी के कोई काम नहीं आता
