कोलकाता. शिक्षक नियुक्ति घोटाले में कलकत्ता हाइकोर्ट द्वारा 25,753 नियुक्तियों को रद्द करने के मामले को लेकर राजनीति उफान पर है. हालांकि इस मामले में राज्य का मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) दफ्तर भी भ्रमित है. हटाये गये शिक्षकों से चुनाव ड्यूटी करायी जायेगी या नहीं, इस पर अब तक संशय बना हुआ है. इस बीच, शुक्रवार को राज्य में दूसरे चरण का चुनाव भी है. इस चरण में 2016 में नियुक्त किये गये 25,753 शिक्षकों से चुनाव ड्यूटी कराये जाने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. इस संबंध में एक शीर्ष चुनाव अधिकारी ने बताया कि, अब तक कलकत्ता हाइकोर्ट को ही मालूम नहीं है कि 25 हजार में से कौन वैध हैं और कौन अवैध. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अवैध रूप से नियुक्त किये गये शिक्षकों की पहचान होने तक सभी 25,753 लोगों को चुनावी ड्यूटी के लिए रिजर्व रखा जायेगा. यानी अगर जरूरत पड़ती है, तो इनसे चुनाव ड्यूटी करायी जायेगी. चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में हो रहे लोकसभा चुनाव के लिए कुल 80,530 मतदान केंद्र तैयार किये गये हैं. मतदान केंद्रों की संख्या की तुलना में 125 फीसदी मतदान कर्मियों को चुनाव ड्यूटी के लिए नियुक्त किया जाता है. इनमें से 25 फीसदी मतदानकर्मियों को रिजर्व में रखा जाता है. वहीं, चुनाव में चार तरह के मतदानकर्मियों की तैनाती की जाती है. इनमें प्रिसाइडिंग ऑफिसर के साथ फर्स्ट पोलिंग, सेकेंड पोलिंग और थर्ड पोलिंग ऑफिसर को मतदान केंद्रों में तैनात किया जाता है. चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, राज्य में मतदान कर्मियों की संख्या पर्याप्त है.
दूसरे चरण के चुनाव से पहले संग्रामी संयुक्त मंच की ओर से चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा गयी. मंच के संयोजक भास्कर घोष के नेतृत्व में सौंपे गये ज्ञापन में आयोग से अस्थायी कर्मियों से चुनाव ड्यूटी न कराये जाने का मांग की गयी है. साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग के माध्यम से राज्य सरकार से 23 लाख ओएमआरसीट एसएससी के पोर्टल पर अपलोड कराये जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को वोट के दौरान संगठन के हेल्प डेस्क सभी मतदान केंद्र में खोले जायेंगे.
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