केंदा हादसा : बुझ गये घर के चिराग, अब अंधेरे भविष्य से जूझ रहे पीड़ित

न्यू केंदा कोलियरी के भुइयां पाड़ा में पानी टंकी ढहने की हृदयविदारक घटना को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.

जामुड़िया.

न्यू केंदा कोलियरी के भुइयां पाड़ा में पानी टंकी ढहने की हृदयविदारक घटना को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. इस हादसे ने न केवल दो घरों के इकलौते कमाऊ सदस्यों को छीन लिया, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया है. मृतक प्रकाश भुइयां (31) अपने परिवार का एकमात्र सहारा था.उसकी मौत के बाद पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. प्रकाश की मां गीता भुइयां ने सिसकते हुए बताया कि प्रकाश की एक छोटी बेटी है, जो केंदा हिंदी प्राइमरी स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ती है. गीता भुंइया का कहना है कि मेरा बेटा चला गया, अब इस बच्ची का क्या होगा? इसकी पढ़ाई और आगे शादी-व्याह की चिंता हमें खाए जा रही है. ईसीएल प्रबंधन की ओर से कोई झांकने तक नहीं आया. मुआवजे के नाम पर सिर्फ आश्वासनों का झुनझुना थमाया गया है.

पवन के घर का बुझा इकलौता चिराग, विधवा पत्नी व दिव्यांग पिता बेबस

वहीं, 20 वर्षीय पवन भुइयां के घर की स्थिति और भी कारुणिक है. महज दो साल पहले उसकी शादी हुई थी. पवन दिहाड़ी मजदूरी कर अपनी पत्नी, बूढ़ी मां और दिव्यांग पिता का पेट भरता था. उसकी मौत के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा है. परिजनों का कहना है कि अब उनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है, लेकिन प्रशासन और ईसीएल की ओर से कोई ठोस मदद नहीं मिली.

हादसे में गंभीर रूप से घायल 10 वर्षीय भरत भुइयां को शनिवार रात अस्पताल से घर वापस ले आया गया. दुखद पहलू यह है कि यह छुट्टी डॉक्टरी सलाह पर नहीं, बल्कि कड़की और तंगहाली की वजह से हुई। भरत की मां मनकी देवी भुइयां ने बताया की हमारे पास अस्पताल का भारी-भरकम खर्च उठाने के पैसे नहीं थे, इसलिए मजबूरी में बेटे को घर लाना पड़ा. उसके पेट और सीने में अंदरूनी चोटें हैं, वह हर वक्त लेटा रहता है. वह केंदा फ्री प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है, लेकिन अब उसका स्कूल जाना बंद है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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