आदिवासी कुड़मी समाज का 20 सितंबर को रेल व सड़क अवरोध

झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लगभग 100 रेलवे स्टेशनों पर आदिवासी कुड़मी समाज अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर रेल रोको और सड़क अवरोध आंदोलन करने जा रहा है.

पुरुलिया.

झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लगभग 100 रेलवे स्टेशनों पर आदिवासी कुड़मी समाज अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर रेल रोको और सड़क अवरोध आंदोलन करने जा रहा है. पुरुलिया जिले के कई रेलवे स्टेशनों और मुख्य सड़कों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम किये गये हैं, तथा पुलिस बल रूट मार्च में तैनात है.

कुड़मी समाज की मांगें और आंदोलन की तैयारी

कुड़मी समाज की तीन प्रमुख मांगें हैं :

1. कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में पुनः मान्यता

2. कुर्माली भाषा को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करना.

3. सरना धर्म को संवैधानिक मान्यता प्रदान करना.

आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव में प्रचार किया जा रहा है, लेकिन इसके विरोध में स्थानीय सामाजिक संगठन और नागरिक सड़क पर उतरकर विरोध जता रहे हैं. उनका कहना है कि यह बंद आम जनता, व्यापारियों और छात्रों के लिए असुविधा पैदा करेगा.

पुरुलिया जिले में पुलिस प्रशासन सतर्क मोड पर है. रूट मार्च निकाले गये हैं और आद्रा रेल मंडल के कुसतौर स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा मॉकड्रिल आयोजित की गयी. जिला पुलिस अधीक्षक अभिजीत बनर्जी और जिला शासक डॉक्टर रजत नंदा ने बताया कि वर्ष 2023 में इसी तरह के बंद को उच्च न्यायालय ने गैरकानूनी करार दिया था, और इस बार भी आंदोलनकारियों को चेतावनी दी गयी है कि कोई गैरकानूनी कार्रवाई की स्थिति में कड़ी कार्रवाई होगी.

आंदोलन के मुखर सलाहकार अजित प्रसाद महतो ने कहा कि यह संघर्ष उनकी अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई है और एसटी दर्जा व कुर्माली भाषा को मान्यता मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रशासन का दावा है कि आम जनता की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता के लिए सभी स्तर पर तैयारी पूरी है.

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By AMIT KUMAR

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