बाबा बेणेश्वर धाम में वर्षों पुरानी बलि प्रथा समाप्त

धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ बलि वेदी का शिवगंगा में विसर्जन, क्षेत्रवासियों ने फैसले का किया स्वागत

पुरुलिया. पारा थाना क्षेत्र के अनारा स्थित बाबा बेणेश्वर धाम शिव मंदिर में गुरुवार को ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पशु बलि प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया. सैकड़ों श्रद्धालुओं, मंदिर के सेवायितों, पुजारियों और मंदिर विकास कमेटी के पदाधिकारियों की उपस्थिति में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ बलि वेदी को शिवगंगा में विसर्जित कर दिया गया. हंसेश्वरानंद गिरि महाराज ने निभायी अहम भूमिका : इस निर्णय को अंतिम रूप तब मिला जब काशी से पधारे संत हंसेश्वरानंद गिरि महाराज को इस विषय से अवगत कराया गया. उन्होंने इसे शास्त्रविरुद्ध बताते हुए स्वयं बलि वेदी को उखाड़कर शिवगंगा में प्रवाहित कर दिया. इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किये गये, जिसमें श्रद्धालुओं ने उल्लासपूर्वक भाग लिया.

हंसेश्वरानंद महाराज ने कहा, “शास्त्रों में बलि प्रथा का कोई स्थान नहीं है, विशेषकर भगवान शिव के पूजन में. यहां तक कि काशी और उज्जैन के काल भैरव मंदिरों में भी बलि नहीं दी जाती. जीव हत्या पाप है. ”

जिले भर में मिली व्यापक सराहना

इस ऐतिहासिक निर्णय को पुरुलिया जिले के लोगों ने तहे दिल से समर्थन दिया है. वर्षों पुरानी इस परंपरा का अंत कर मंदिर ने समाज को अहिंसा और शुद्ध भक्ति का संदेश दिया है.

500 वर्ष पुरानी परंपरा का हुआ समापन

मंदिर विकास कमेटी के सचिव विश्वजीत चक्रवर्ती और सेवायित सजल देवघरिया ने बताया कि लगभग 500 वर्ष पूर्व काशीपुर के राजा की उपस्थिति में बाबा बेणेश्वर की पूजा की शुरुआत हुई थी. काल भैरव मंदिर के सामने बलि वेदी स्थापित की गई थी, जहां पशु बलि दी जाती थी. समय के साथ श्रद्धालुओं की मांग बढ़ती गयी कि इस प्रथा को समाप्त किया जाये.

शिवगंगा की पवित्रता बनाये रखने का संकल्प

मंदिर परिसर स्थित शिवगंगा को अब स्वच्छ और पवित्र रखने का भी संकल्प लिया गया है. श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि शिवगंगा में अब कोई भी बर्तन या कपड़ा न धोये, ताकि पूजा के लिए पवित्र जल उपलब्ध हो सके और श्रद्धालु चरणामृत भी प्राप्त कर सकें.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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