75 साल से हो रही है दुर्गापूजा, मंदिर बनते ही लग गया ताला

75 वर्षों से जिस जगह दुर्गापूजा होते आ रहा है, वहां मंदिर बनते ही नियमित पूजा पर लग गयी रोक.

आसनसोल.

75 वर्षों से जिस जगह दुर्गापूजा होते आ रहा है, वहां मंदिर बनते ही नियमित पूजा पर लग गयी रोक. वर्ष 2009 में 45 लाख रुपये में मंदिर के लिए खरीदा गया साढ़े तीन कट्ठा जमीन, जिसपर बनाया गया मंदिर. साल में सिर्फ तीन बार ही प्रवेश की मिलती है अनुमति. दुर्गापूजा, काली पूजा और लक्ष्मी पूजा में ही मंदिर का द्वार खुलता है. बाकी समय मंदिर में ताला लगा रहता है. यह कहानी किसी अन्य देश की नहीं, पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता के बाद सबसे बड़े शहर आसनसोल की है. भाजपा की जीत के बाद सोमवार रात को सैकड़ों सनातनियों ने आकर मंदिर ताला तोड़ दिया और जय श्री राम के नारे लगाने लगे. मंगलवार सुबह मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद वहां पूजा अर्चना शुरू हो गयी. स्थानीय लोग इसके लिए इलाके से भाजपा के टिकट पर विजयी उम्मीदवार कृष्णेन्दु मुखर्जी को पूरा श्रेय दे रहे हैं. उन्होंने स्थानीय लोगों से वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनते ही मंदिर का द्वार खुल जायेगा और वह खुल गया. मंदिर ट्रस्टी के लोग अब इसपर अपना वैध अधिकार चाहते हैं.

क्या है मंदिर की पूरी कहानी, ट्रस्टी संजय अग्रवाल की जुबानी

श्री श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के एक ट्रस्टी व व्यवसायी संजय अग्रवाल ने बताया कि आसनसोल बस्तीन बाजार इलाके के स्थित माता दुर्गा का यह मंदिर वर्ष 2012-13 में बना, अभी भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है. यह 75 वर्षो से दुर्गापूजा का आयोजन है. यह जमीन अतिन नारायण चौधरी की थी. इस जमीन को उन्होंने एक अल्पसंख्यक समुदाय के प्रोमोटर को वर्ष 2009 में बेच दी. इसे लेकर मामला एसडीओ के पास गया. वहां बैठकर निर्णय हुआ कि सात दिनों के अंदर यदि 45 लाख रुपये का भुगतान कर दिया जाएगा, तो जमीन मंदिर के नाम पर हो जाएगी. सात दिनों में ही पैसे का भुगतान कर जमीन मंदिर के नाम रजिस्ट्री हो गयी. मंदिर निर्माण की मंजूरी, प्लान पास आदि सरकारी कार्य पूरा करने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ. जैसे ही निर्माण कार्य शुरू हुआ, विशेष समुदाय के लोगों ने यहां पूजा अर्चना करने के खिलाफ प्रशासन में शिकायत की. जिसपर दोनों पक्षों को लेकर अतिरिक्त जिलाधिकारी ने बैठक की और विशेष समुदाय को चेताया कि किसी के पूजा के अधिकार को कोई नहीं रोक सकता है.

मंदिर का काम चालू रहा, इसबीच वर्ष 2011 में तृणमूल की सरकार बनी. पुनः विशेष समुदाय के लोगों ने इसे लेकर प्रशासन में शिकायत की, इस बार एडीएम ने निर्माण दिया कि मंदिर में साल में सिर्फ तीन बार ही पूजा किया जा सकता है. दुर्गापूजा, कालीपूजा और लक्ष्मी पूजा में, बाकी दिन मंदिर बंद रहेगा. इसे लेकर उच्च नयायालय के मामला किया गया. अदालत ने प्रशासन से रिपोर्ट मांगी. प्रशासन ने रिपोर्ट दिया कि यदि यहां नियमित पूजा की अनुमति दी जाती है, तो दंगा हो सकता है. जिसपर अदालत ने दोनों पक्षों को बैठाकर आपसी सुलह करने का निर्देश प्रशासन को दिया. प्रशासन जब भी बैठक बुलाता है, दूसरा पक्ष नहीं जाता है. इसे लेकर भी अदालत को पूरी जानकारी दी गयी. मामला अभी भी विचाराधीन है. मंदिर के पीछे की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है. इस बीच सोमवार को सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने आकर मंदिर का ताला तोड़ दिया और मंगलवार सुबह मंदिर की साफ-सफाई करके पूजा अर्चना शुरू हो गयी. जबतक प्रशासन से कोई लिखित आदेश ट्रस्टी को नहीं मिलता है, वह मंदिर हैंडओवर नहीं लेगी. उन्होंने इसे सनातनियों की जीत बताया, कहा कि भाजपा उम्मीदवार कृष्णेन्दु मुखर्जी ने वादा किया था, वह पूरा किया.

क्या कहते हैं लोग

निगम के पूर्व पार्षद शिवप्रसाद बर्मन ने कहा कि पिछले 14 वर्षों से मंदिर में नियमित पूजा पर रोक लगी थी. कुछ लोगों ने पूजा करने पर आपत्ति जतायी थी और प्रशासन भी उन्हें समर्थन दिया. लेकिन अब 14 वर्षों के बाद मंदिर के खुलने से पूरे आसनसोल क्षेत्र में उत्सव का माहौल है और जनता में खुशी की लहर दौड़ गयी है. भाजपा के प्रत्याशी रहे कृष्णेंदु मुखर्जी ने यहां आकर वादा किया था कि भाजपा जीती तो मंदिर में पूजा-अर्चना नियमित होने लगेगी. आज उन्होंने अपना वादा पूरा करते हुए मंदिर खुलवा दिया है. बराकर व आसनसोल के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

स्थानीय एक दिव्यांग महिला सीमा सिंह मंदिर खुलने की सूचना पर यहां दर्शन करने पहुंचीं और कहा कि पहले राज्य में ऐसा डर का माहौल था कि लोग अपने धर्म के नारे तक खुल कर नहीं लगा पाते थे. अब माहौल बदल गया है. अपने धर्म, सम्मान व आत्मसम्मान की रक्षा का अधिकार मिलना चाहिए. सरकार बदलने के साथ ही मंदिर का पट खुलने से सभी सनातनी उत्साहित हैं. अब वे खुल कर जय श्रीराम का जयघोष कर सकते हैं.

धधका रोड, सुकांतपल्ली के निवासी मनीष पांडेय ने कहा कि यह उनके क्षेत्र का प्राचीन दुर्गा मंदिर है, जो बीते लगभग 15 वर्षों से बंद पड़ा था. यहां पूजा-पाठ पूरी तरह से बंद था, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी निराशा थी.

मंदिर फिर खुलने व पूजा-अर्चना शुरू होने से इलाके में खुशी व उल्लास का माहौल है. वे अपने पिता संग अक्सर मंदिर में दर्शन करने आया करते थे और बाहर से ही प्रणाम करके चले जाते थे. उनके पिता का निधन हो गया, आज वे रहते तो काफी खुश होते.

धधका रोड के ही निवासी प्रशांत पांडेय ने कहा कि यह उनके लिए गर्व व हर्ष का क्षण है. इस खुशी को शब्दों में नहीं ढाला जा सकता. लगभग 15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद जब मंदिर के कपाट खुले हैं, तो यह पूरे आसनसोल वासियों के लिए ऐतिहासिक व भावुक पल बन गया है. मंदिर के फिर से खुलने से लोगों की धार्मिक भावनाओं को नयी ऊर्जा मिली है और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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