सड़क पर सैकड़ों भाजपाइयों ने उतर कर जताया प्रतिवाद, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की कई प्रदर्शनकारियों को पकड़ पुलिस ले गयी थान, फिर बाद में छोड़े गये आसनसोल /बर्नपुर. आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पाल को लेकर सोशल मीडिया में एक समाज सेवी की कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी को लेकर भाजपाइयों में उबाल है. सोमवार को उक्त विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों भाजपाइयों व समर्थकों ने सड़क पर उतर कर विवादित बयान देनेवाले समाजसेवी मिठाई बाबू के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की. इन लोगों ने त्रिवेणी मोड़ पर पथावरोथ कर विरोध प्रदर्शन किया. मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने के लिए बल प्रयोग किया, तो प्रदर्शनकारी भड़क गये. पुलिस वालों से उनकी धक्का-मुक्की भी हुई. पुलिस ने कई भाजपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. भाजपा के विरोध प्रदर्शन के कारण त्रिवेणी मोड़ पर वाहनों की आवाजाही तकरीबन आधे घंटे तक बाधित रही. हालांकि पुलिस ने बल-प्रयोग पर प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटा दिया. उसके बाद वाहनों की आवाजाही वहां से सामान्य हुई. गौरतलब है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर विधायक अग्निमित्रा पाल पर अभद्र टिप्पणी करनेवाले मिठाई बाबू के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. आंदोलनरत भाजपा नेताओं ने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. वहीं, विधायक अग्निमित्रा पाल ने इस मुद्दे को लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया का मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली बात बिना सोचे-समझे लिख दे. उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह से अभद्र तरीके से वायरल करने का अधिकार किसी को नहीं है. अग्निमित्रा पाल ने यह भी साफ किया कि वह इस संबंध में विधिसम्मत तरीके से शिकायत भी दर्ज कराएंगी ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले सौ बार सोचे. इस मामले में मिठाई बाबू ने भी अपने फेसबुक अकाउंट से एक स्पष्टीकरण जारी किया है. उन्होंने इस टिप्पणी को लेकर कहा कि यह एक स्पेलिंग मिस्टेक (वर्तनी की गलती) से हुआ है और इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी. मिठाई बाबू ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर खुद को डिजिटल क्रिएटर बताया है. उनके सोशल मीडिया एकाउंट में आये दिन कई तृणमूल नेताओं के साथ तस्वीरें देखी जा सकती हैं. जिसे लेकर अब राजनीतिक गरमा गयी है. इस घटनाक्रम के बाद आसनसोल की राजनीति में हलचल तेज हो गयी. गौरतलब है कि सोशल मीडिया आज के दौर में लोगों की अभिव्यक्ति का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है. वहीं यह भी देखा जा रहा है कि आये दिन इसमें एक-दूसरे पर व्यक्तिगत टिप्पणी, ट्रोलिंग और अपमानजनक भाषा का प्रयोग बढ़ता जा रहा है. राजनीतिक क्षेत्र में यह और भी संवेदनशील बन चुका है. क्योंकि इससे जनप्रतिनिधियों की गरिमा और छवि पर सीधा असर पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में त्वरित कार्रवाई और सही तथ्यों के आधार पर जांच की जानी चाहिए ताकि कोई निर्दोष न फंसे और दोषी बच न जाये.
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