23-26 दिसंबर तक आयोजित होगा मेला
पानागढ़ : विश्वभारती शांतिनिकेतन प्रबंधन की ओर से पांच जून को एक विज्ञप्ति जारी कर पौष मेला के परिचालन को लेकर हाथ खड़े कर देने के बाद से इसके आयोजन को लेकर संशय पैदा हो गया था. पौष मेला के बंद होने की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों में मायूसी छा गयी थी. लेकिन गुरूवार को विशेष बैठक करने के बाद विश्व भारती शांतिनिकेतन प्रबंधन की ओर से पौष मेला के आयोजन को लेकर हरी झंडी मिल गयी है. पौष मेला को लेकर विश्व भारती प्रबंधन अपने दायित्व के निर्वाह के लिए राजी हो गया है.
बताया जाता है कि एक माह पूर्व ही विश्व भारती के उपाचार्य डॉ विद्युत चक्रवर्ती ने पौष मेला ट्रस्ट तथा विश्व भर्ती प्रबंधन के अन्य अधिकारियों के साथ अहम बैठक करने के बाद कहा था कि पौष मेला के आयोजन के खर्च का भार विश्व भारती प्रबंधन नहीं उठायेगी. ऐसे में पौष मेला के भविष्य पर खतरे का बादल मंडराने लगा था. विश्व भारती प्रबंधन के हाथ खड़े कर देने से इस प्राचीन मेले के अस्तित्व पर सवाल उठने लगा था. इसका सबसे अहम सवाल था प्रदूषण. पौष मेले में प्रदूषण को लेकर विश्व भारती प्रबंधन को बार-बार अदालत की फटकार से गुजरना पड़ता था.
विश्व भारती प्रबंधन की ओर से मेले को बंद कर देने की सूचना के बाद से विश्व भारती आश्रम में रहने वाले लोगों, शहरवासियों तथा इस मेले से जुड़े व्यवसायियों में घोर निराशा छा गयी थी. इसे लेकर तरह-तरह से लोगों द्वारा मेले को जारी रखने की मांग की जा रही थी. इसलिए कई बार विश्व भारती प्रबंधन तथा अन्य अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद विश्व भारती प्रबंधन इस बात पर राजी हुआ है कि इस वर्ष पौष मेला 4 दिन का ही होगा तथा पौष मेले में ऑनलाइन स्टॉल के लिए बुकिंग होगी. इसके अलावा मेला परिसर में लकड़ी के चूल्हे पर पाबंदी लगा दी गयी है.
वहीं, प्लास्टिक पूरी तरह से बैन कर दिया गया है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम की मांग की गयी है. इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग के बाद स्टॉल लगाने वालों से डिपोजिट मनी के रूप में रूपया लिया जायेगा, जो मेला के शेष होने के बाद उन्हें वापस किया जाएगा. विश्व भारती के उपाचार्य द्वारा इन बातों को विशेष रूप से ट्रस्ट के समक्ष रखा गया है. बताया जाता है कि मेला परिचालन हेतु एक विशेष कमेटी का भी गठन किया जाएगा. पौष मेले के परिवेश को लेकर कई बार उठे सवालों के जवाब में पर्यावरणविद सुभाष दत्त ने बताया कि पौष मेले के पर्यावरण दूषण के मुद्दे पर कभी भी अदालत ने मेले को बंद करने की बात नहीं कही है.
सुभाष दत्त ने बताया कि परिवेश अदालत का कहना है कि मेले में पर्यावरण का संतुलन बना रहे. इसी को लेकर विश्व भारती से परिवेश अदालत हर बार आग्रह करता रहा है, ना कि मिले को बंद करने के खिलाफ. मेले को बंद करने का फैसला विश्व भारती प्रबंधन ने लिया था. विश्व भारती की पूर्व उपाचार्य तथा शांतिनिकेतन ट्रस्ट की ट्रस्टी सबूज कली सेन का कहना है कि पौष मेला होगा इसे लेकर कोई दो मत नहीं है. लेकिन मेला छह दिन की जगह चार दिन का होगा. सबूज कली सेन ने बताया कि 23 से 26 दिसंबर 4 दिन उक्त पौष मेला का आयोजन होगा.
