रानीगंज, जामुड़िया, कुल्टी नपा को बताया पता

शर्मनाक : जिनके पास है जिले के शिक्षा को उन्नत करने का दायित्व, वे ही निकले लापरवाह वर्ष 2016 में ही इनका विलय हो गया था आसनसोल नगर निगम में 37 स्कूलों की प्रबंध कमेटियों को भंग कर डीडीओ नियुक्ति का मामला आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर […]

शर्मनाक : जिनके पास है जिले के शिक्षा को उन्नत करने का दायित्व, वे ही निकले लापरवाह

वर्ष 2016 में ही इनका विलय हो गया था आसनसोल नगर निगम में
37 स्कूलों की प्रबंध कमेटियों को भंग कर डीडीओ नियुक्ति का मामला
आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को उन्नत करने तथा छात्र-छात्राओं को अपडेट करने का दायित्व लेनेवाले जिला शिक्षा विभाग को ही अपडेट जानकारी नहीं है. जिला शिक्षा निरीक्षक ने हाल ही में 37 स्कूलों की प्रबंध कमेटियों को भंग कर उनमें डीडीओ की नियुक्ति की सूचना जारी की है.
इन स्कूलों के पता में कुल्टी नगरपालिका, जामुड़िया नगरपालिका और रानीगंज नगरपालिका का उल्लेख किया गया है. अब जिला शिक्षा निरीक्षक को कौन बताये कि ये तीन नगरपालिका इस समय अस्तित्व में नहीं है. इनका विलय वर्ष 2016 में ही आसनसोल नगर निगम में किया जा चुका है. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग तथा जिला शिक्षा निरीक्षक को खुद को ही सूचना के बारे में अपडेट होने की जरूरत है.
सेकेंडरी एजुकेशन के जिला स्कूल निरीक्षक ने जिला के 37 सरकार स्पॉन्सर्ड उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों में ड्राइंग एंड डिसवरसिंग ऑफिसर (डीडीओ) की नियुक्ति को लेकर जो आदेश जारी किया है. उसमें 11 स्कूलों को आसनसोल नगर निगम इलाके में, नौ स्कूलों को रानीगंज नगरपालिका इलाका में, 12 स्कूलों को जामुड़िया नगर पालिका और एक स्कूल को कुल्टी नगरपालिका क्षेत्र के अधीन बताया गया है. जिला स्कूल निरीक्षक द्वारा पत्राचार में की गई इस प्रकार की गलती सभी स्कूलों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
शिक्षकों ने कहा कि जिला शिक्षा विभाग के स्तर से इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है? मामूली गलती होने पर शिक्षकों तथा प्रधानाध्यापकों को शो-कॉज थमा दिया जाता है. इन महाश्य को कौन शो-कॉज करेगा? यदि इस तरह की लापरवाही होगी तो शिक्षा के क्षेत्र में तो भगवान ही मालिक है.
सनद रहे कि जिला के 37 सरकारी स्कूलों में पिछले चार वर्ष के दौरान नई प्रबंधन कमेटी का गठन नहीं होने से सरकारी दिशानिर्देश के आधार पर सभी स्कूलों में कमेटी भंग कर दी गई है और स्कूलों में डीडीओ की नियुक्ति जिला स्कूल निरीक्षक ने कर दी. डीडीओ के कार्यकाल के दौरान स्कूल में शिक्षकों के वेतन के अलावा अन्य किसी भी फंड का खर्च नहीं किया जा सकेगा.
डीडीओ का कार्यकाल अधिकतम छह माह का होता है. छह माह के दौरान भी यदि प्रबंधन कमेटी का गठन नहीं हुआ तो स्कूल में प्रशासक की नियुक्ति की जायेगी. प्रशासक स्कूल के सभी फंड का उपयोग कर सकते है. 37 स्कूलों में डीडीओ को नियुक्ति को लेकर स्कूल निरीक्षक ने जो आदेश जारी किया है उसमें उनके पते के रूप में आसनसोल नगर निगम के साथ जामुड़िया, रानीगंज और कुल्टी नगरपालिका का जिक्र किया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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