आसनसोल : स्थानीय भगत सिंह मोड़ पर स्थित शहीद-के-आजम भगत सिंह की प्रतिमा के पीछे सिख धर्म की मर्यादा परमात्मा स्वरूप खंडा साहिब को स्थापित किये जाने के विवाद को सुलझाने को लेकर तख्त श्री पटना साहिब के सदस्य हरपाल सिंह की पहल पर पश्चिम बर्दवान, पुरुलिया और झारखंड के गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटियों के प्रधान व सदस्यों की बैठक शुक्रवार को ध्रुबडंगाल गुरुद्वारा परिसर में हुई.
सभी ने खंडा साहिब स्थापना का विरोध किया. सर्वसम्मति से खंडा साहिब को ससम्मान हटाने तथा गुरू के नाम पर रहे सड़क या मोड़ के पास स्थापित करने का निर्णय लिया गया. मेयर जितेन्द्र तिवारी से लिखित अपील की जायेगी. बैठक में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी से प्रधान या उसके किसी पदाधिकारी के उपस्थित न होने से नाराज उपाध्यक्ष सह परबेलिया गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान मलकीत सिंह ने सेंट्रल कमेटी से इस्तीफा दे दिया.
बैठक में ये प्रतिनिधि थे उपस्थित
तख्त श्री पटना साहिब के सदस्य श्री सिंह द्वारा खंडा साहिब को लेकर पिछले कुछ दिनों के शिल्पांचल में चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए बुलायी गयी बैठक में झारखंड से निरसा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान मंजीत सिंह, पुरुलिया जिला से पारबेलिया गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान मलकीत सिंह, चिनाकुड़ी गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान सोहन सिंह, बराकर गुरूद्वरा प्रबंधन कमेटी के पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह, सदस्य हरदयाल सिंह, चित्तरंजन गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान सुरेंद्र सिंह, आसनसोल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रभारी सरबजीत सिंह, सदस्य मनजीत सिंह सलूजा
ध्रुबडंगाल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के सचिव अवतार सिंह, उपप्रधान सुरेंद्र सिंह, रानीगंज जीटी रोड गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के सलाहकार सुरेंद्र सिंह, सदस्य माधो सिंह, अंडाल बाजार गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान हरदेव सिंह, सचिव अजित सिंह, दुर्गापुर गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान गुरुदयाल सिंह के प्रतिनिधि अमृत सिंह, पानागढ़ गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान हरवंश सिंह, सदस्य महेंद्र सिंह सलूजा, बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के पूर्व प्रधान चरनजीत सिंह, खालसा सेंट्रल गुरुद्वारा के उपाध्यक्ष यशवंत सिंह, हेमकुंड सेवा समिति (आसनसोल) के देवेंद्र मलहोत्रा, दुर्गापुर सेवा खालसा दल के प्रधान दलविंदर सिंह, अमन गिल, राणा सिंह आदि मुख्यत: उपस्थित थे.
मलकीत सिंह ने इस्तीफा दिया
परबेलिया गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान सह सेंट्रल कमेटी के उपाध्यक्ष मलकीत सिंह ने बैठक में सेंट्रल कमेटी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने बताया कि सिख धर्म की हित मे सेंट्रल कमेटी का गठन हुआ था. खंडा साहिब को लेकर जो विवाद चल रहा है, यह सिख धर्म के लिए काफी चिंता की विषय था. इस मुद्दे पर सेंट्रल कमेटी ने कोई पहल नहीं की. तख्त श्री पटना साहिब के सदस्य श्री सिंह ने इस मुद्दे को सुलझाने लिए पहल की. सेंट्रल कमेटी ने इस पहल में शामिल न होकर सही कार्य नहीं किया.
खंडा के लिए चौराहा का चयन
तख्त श्री पटना साहिब के सदस्य श्री सिंह ने बताया कि बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि खंडा साहिब किसी भी व्यक्ति या गुरु के भी पीछे नहीं लग सकते हैं. मेयर श्री तिवारी से चर्चा की गयी है कि खंडा साहिब को सही जगह स्थापित करने के लिए शहर में किसी चौक, मोड़ या मार्ग गुरु गोविंद सिंह के नाम से करें. वहां खंडा साहिब को स्थापित किया जायेगा. रामबंधू तालाब गुरुनानक सामुदायिक भवन के पास या बिग बाजार चित्रा मोड़ के पास गुरुनानक देब के नाम से मार्ग या चौक बनाने की सहमति हुयी.
बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी चुनाव पर बैठक 14 को
आसनसोल. शहीद-के-आजम भगत सिंह की प्रतिमा के साथ सिख धर्म की मर्यादा खंडा साहिब को स्थापित करने के बाद सिख समुदाय में उठे विवाद को देखते हुए प्रशासन भी हरकत में है. बर्नपुर गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की चुनाव तत्काल कराने को लेकर आसनसोल सदर के महकमा शासक प्रलय रायचौधरी ने 14 दिसंबर को गुरुद्वारा के दोनों गुट के सदस्यों को अपने कार्यालय में बैठक के लिये पत्र भेजा. चरणजीत सिंह, बलवंत सिंह, सरदार जसबीर सिंह, सरदार मनमोहन सिंह वाधवा को भेजा गया. गुरुवार को जिला अल्पसंख्यक मामलों के अधिकारी लोदेन लेप्चा ने प्रबंधन कमेटी के विपक्षी गुट के प्रतिनिधियों को बुलाकर बैठक की और उन्हें बैठक में उपस्थित रहने का पत्र सौंपा. चरनजीत सिंह, चरण सिंह, बलवंत सिंह और देवेंद्र मल्होत्रा उपस्थित थे, महकमा शासक श्री रायचौधरी ने बताया कि दोनों गुट की ओर से गुरुद्वारा में चुनाव कराने अपील की गयी थी. जिसपर दोनों गुट के सदस्यों को चुनाव कराने को लेकर बैठक बुलायी गयी है.
पानागढ़ सिख संगत में भी नाराजगी, हो सामूहिक समाधान
पानागढ़. पानागढ़ गुरुनानक गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रधान सरदार हरवंश सिंह ने कहा कि आसनसोल में भगत सिंह की प्रतिमा के पीछे खंडा साहिब को लगाना गलत निर्णय है. यह धर्म का अपमान है. खंडा साहिब की स्थापना पूरे सम्मान के साथ होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भगत सिंह का बलिदान भी देश के लिए है. उसकी भी मर्यादा पूरी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि दोनों को पूरा सम्मान मिलना चाहिए. कमेटी के कोषाध्यक्ष दलवीर सिंह चड्डा ने कहा कि किसी प्रतिमा के पीछे खंडा साहिब का लगना उचित नहीं है. इसका सुधार होना चाहिए तथा खंड़ा साहिब का पूरा सम्मान होना चाहिए. इनके सम्मान पर ध्यान देना होगा. सिख संगत सामूहिक रूप से इसका निराकरण नहीं. कमेटी सदस्य हरजीत सिंह निक्की ने कहा कि धार्मिक दृष्टिकोण से खंडा साहिब का किसी प्रतिमा के पीछे लगाना उचित नहीं. सिख धर्म के लिए वे पवित्र व पूजनीय है. भगत सिंह की प्रतिमा के साथ उन्हें जोड़ा जाना उचित नहीं है. भगत सिंह की अपनी भी मर्यादा है. उनकी शहादत कभी भूली नहीं जा सकती. दोनों दो अलग-अलग विचार हैं. सरदार सुमित सिंह उर्फ लवली ने कहा कि भगत सिंह की प्रतिमा के पीछे सिख धर्म का प्रतीक खंडा साहिब लगाना अनुचित कार्य है. इसे इगो का मुद्दा न बना कर इसका ससम्मान हल निकाला जाना चाहिए. गुरमत लहर ऑर्गेनाजेशन के सदस्य सरदार हरजीत सिंह अस्सी ने कहा कि सिख धर्म का प्रतीक खंडा साहिब का भगत सिंह की प्रतिमा के पीछे लगाना गलत है तथा इस पर राजनीति नही होनी चाहिए. शहीद भगत सिंहले नास्तिक थे. या तो खंड़ा साहिब को अन्यत्र ससम्मान स्थापित किया जाये या फिर भगत सिंह की प्रतिमा हटाई जाये. सरदार भूपेंद्र सिंह उर्फ मंगा ने कहा कि खंडा साहिब भगवान के प्रतीक है. उनकी मर्यादा होती है. इसलिए खंडा साहिब वहां नहीं रहना चाहिए.
प्रतिष्ठा कम करने के खिलाफ रानीगंज सिख सेवा समिति
रानीगंज. भगत सिंह की प्रतिमा के साथ खंडा साहिब स्थापित किये जाने पर रानीगंज सिख सेवा समिति के सदस्य मनमीत सिंह ने कहा कि भगत सिंह सिख धर्म के धार्मिक गुरु नहीं है. बल्कि राष्ट्रीय नेता हैं. उन्हें किसी धर्म से जोड़ना कतई उचित नहीं है. इस दिशा में सामूहिक पहल होनी चाहिए. किसी धर्म से जोड़ना उन्हें कम करके आंकना है. विक्की सलूजा ने कहा कि शहीद ए आजम भगत सिंह देश के सच्चे नायक थे एवं उन्होंने राष्ट्र के लिए कम उम्र में बलिदान दिया था. उनकी प्रतिमा के साथ खंडा साहिब स्थापित करना सिख धर्म के साथ साथ शहीद ए आजम भगत सिंह का भी के प्रति भी न्याय संगत नहीं है. उनका सम्मान किया जाना चाहिए. मनदीप सिंह ने कहा कि भगत सिंह ने अंतिम समय तक किसी धर्म को नहीं अपनाया. उनको किसी विशेष धर्म में बांटना ठीक नहीं है. उनकी प्रतिमा के साथ खंड़ा साहिब को लगाना दोनों का कद छोटा करना है.
