उत्पादन, प्रेषण में वृद्धि लाने का निर्देश

चुनौती. वित्तीय वर्ष के बचे तीन महीने में महाप्रबंधकों के लिए टास्क तय सांकतोडिया : इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंधक निदेशक (सीएमडी) सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि एरिया महाप्रबंधक को उत्पादन के साथ-साथ डिस्पैच में भी तेजी लाना होगा, ताकि कंपनी अपने उत्पादन लक्ष्य के मुताबिक प्रदर्शन कर पाये. वे सोमवार को […]

चुनौती. वित्तीय वर्ष के बचे तीन महीने में महाप्रबंधकों के लिए टास्क तय

सांकतोडिया : इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (इसीएल) के अध्यक्ष सह प्रबंधक निदेशक (सीएमडी) सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि एरिया महाप्रबंधक को उत्पादन के साथ-साथ डिस्पैच में भी तेजी लाना होगा, ताकि कंपनी अपने उत्पादन लक्ष्य के मुताबिक प्रदर्शन कर पाये. वे सोमवार को कंपनी मुख्यालय के सम्मलेन कक्ष में महाप्रवंधक समन्वय समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बैठक की अध्यक्षता की. सीएमडी श्री चक्रवर्ती ने क्षेत्रवार सभी एरिया के महाप्रवंधकों से बारी-बारी से उत्पादन व उत्पादकता की स्थिति की जानकारी ली. साथ ही सभी से उनकी समस्याएं भी सुनी.
बैठक में कार्मिक निदेशक केएस पात्न, वित्त निदेशक एएम मराठे, तकनीकी निदेशक (संचालन) सुनील कुमार झा, सीएमडी के तकनीकी सचिव नीलाद्रि राय सहित सभी एरिया के महाप्रवंधक एवं मुख्यालय के विभागाध्यक्ष मौजूद थे. कंपनी सभी क्षेत्रों में दिसंबर माह तक नेगेटिव ग्रोथ में है. इस माह में नेगेटिव ग्रोथ से पॉजिटिव करना है. उन्होंने कहा कि खदानों में सुरक्षा व्यवस्था को और भी बेहतर करना होगा. साथ ही साथ कोयले क्वालिटी पर भी ध्यान देना होगा.
अगर उत्पादन अधिक हुआ मगर कोयले की क्वालिटी खराब हुई तो कंपनी को घाटा होगा. क्योंकि किसी भी चीज का कीमत उसके क्वालिटी पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा कि कंपनी की आर्थिक स्थिति सुदृढ करने करने के लिये कोयले के उत्पादन लागत और अनावश्यक खर्च में कमी लानी होगी. इसके साथ ही कार्यशैली में सुधार लाते हुये ईमानदारी पूर्वक काम करने का नसीहत दी. चालू वित्तीय वर्ष के दिसंबर माह तक उत्पादन में 1.6 प्रतिशत का नेगेटिव ग्रोथ है. चालू वित्तीय वर्ष के दिसंबर माह तक 28.1 मिलियन टन उत्पादन किया, जबकि पिछले बीते वर्ष में इसी समय में 28.5 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया था.
कोयले के डिस्पैच में भी 6.5 प्रतिशत का नेगेटिव ग्रोथ है. चालू वित्तीय वर्ष में दिसंबर माह तक 29.5 मिलियन टन डिस्पैच किया है. जबकि पिछले वर्ष 2016-17 में 31.5 मिलियन टन कोयला डिस्पैच किया था. अधिभार हटाने में भी आठ प्रतिशत का नेगेटिव ग्रोथ है सिर्फ भूमिगत खदानों में उत्पादन में 6.8 प्रतिशत का पाजिटिव ग्रोथ है. उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष में सिर्फ तीन महीने का समय बचा हुआ है. अभी भी अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं. इसलिये तेजी लायें ताकि दिये गये लक्ष्य को पूरा कर सके.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >