कोलकाता: महानगर के जेलों में कैदियों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल करने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं. हाल ही में जेल के अंदर एक विचाराधीन कैदी की मौत की घटना के बाद जेल के अंदर की तसवीर प्रभात खबर ने छापी थी. अखबार में यह तसवीर व खबर प्रकाशित होने के बाद अब जाकर प्रशासन व जेल प्रबंधन की नींद टूटी है. जेल सूत्रों के मुताबिक जेल के अंदर की सुरक्षा में सेंध लगाने की खबर जानने के बाद से वरिष्ठ अधिकारी सकते में हैं.
जेल सूत्रों के मुताबिक इन सारे सवालों के जवाब तलाशने के लिए अलीपुर प्रेसिडेंसी जेल में जांच कमेटी गठित की गयी है. जेल के सुपर नवीन साहा को एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. उन्हें जांच कर यह पता लगाने को कहा गया है कि जेल के अंदर की तसवीर बाहर कैसे गयी व इसमें कौन जुड़ा है. जांच के निर्देश के बाद से जेलकर्मी से लेकर कैदियों में दहशत है.
पुराना है जेल के कैदियों का मोबाइल से रिश्ता
जेलकर्मियों के मुताबिक जेल में मोबाइल व अत्याधुनिक उपकरण के इस्तेमाल की घटना नयी नहीं है. इससे पहले भी जेल में कैदियों द्वारा मोबाइल का इस्तेमाल होता रहा है. जेल से व्यापारियों को फोन कर उनसे रुपये मांगने की घटना हो या फिर किसी को फोन कर धमकाने की घटना. सभी मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं. जेल में कैदियों के पास मोबाइल के इस्तेमाल की घटना के सामने आने के कारण हर शनिवार को स्थानीय थाने की तरफ से कैदियों के सेल में तलाशी की जाती है. इस दौरान कई कैदियों के पास से मोबाइल व सिमकार्ड बरामद होते रहते है. हैरानी की बात तो यह है कि तरक्की के इस युग में जेलों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल हो रहा है. इससे किसी भी घटना की लाइव तसवीर व वीडियो बाहर भेजे जा सकते हैं.
हाल ही में जेल से गिरफ्तार हुए तीन कैदी
प्रेसिडेंसी जेल से मोबाइल का इस्तेमाल कर गत पांच फरवरी को एक कैदी ने एक वेब डिजाइनर का अपहरण करवा कर उसके परिवार से सात लाख रुपये वसूले थे. सबूत हाथ लगने पर कोलकाता पुलिस ने इस सिलसिले में जेल के अंदर से तीन कैदियों को गिरफ्तार भी किया था. उसमें से एक कैदी के घर में जांच करने पर पुलिस को वहां से फिरौतीके सात लाख रुपये में से 24 हजार रुपये भी मिले थे.
सिर्फ प्रदर्शनी का सामान बन गया है जैमर
गौरतलब है कि जेल में कैदियों के मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक के लिए राज्य के विभिन्न जेलों में मोबाइल जैमर लगाये गये हैं. लेकिन अब वे जैमर सिर्फ प्रदर्शनी के सामान बन कर रह गये हैं. विभिन्न तरीके से जैसे जेल से अदालत ले जाते समय कैदियों के पास मोबाइल व सिमकार्ड पहुंचाया जाता है, तो कहीं जेलों में कैदियों से मिलनेवाले परिजन उन्हें मोबाइल दे देते हैं. कुछ कैदी जेल के अंदर कर्मियों की मदद से ही मोबाइल मंगवा लेते हैं.
जिन सवालों पर हो सकती है चर्चा
1. किस तरह से जेल के अंदर की तसवीर बाहर गयी
2. इस तसवीर को किसने मीडिया में लीक करवाया
3. जेल में सुसाइड की घटना के बाद जब जेलकर्मी शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने में व्यस्त थे, उस समय कौन था जिसने पूरी घटना की तसवीर खींची. जेल की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए घटना की तसवीर मीडिया को भेज दी
4. तसवीर मोबाइल से खींची गयी या छोटे कैमरे से
5. जो जेल से तसवीर बाहर भेज सकता है, वह अंदर की जानकारी भी सार्वजनिक कर सकता है.
किराये पर मिलता है जेल के अंदर मोबाइल
जेल में सजा काट रहे कुछ कैदियों ने बताया कि कैदियों को अपने घरवालों से बात करने के लिए किराये पर मोबाइल फोन मिल जाता है. पांच से 10 मिनट बात करने पर कैदियों से एक से 150 रुपये वसूले जाते हैं. किराये पर मोबाइल उपलब्ध कराने का धंधा कुछ कैदी भी चला रहे हैं, तो कुछ जेलकर्मी भी. जेल में चोरी-छिपे यह धंधा धड़ल्ले से चल रहा है. जो जेलकर्मी इसमें लगे हैं, न तो उनके नाम पर मोबाइल फोन है और न ही कनेक्शन. लिहाजा किसी तरह फंसने पर वह आसानी से पल्ला झाड़ कर निकल सकते हैं. किराये के मोबाइल का इस्तेमाल कर कुछ कैदी लोगों को धमकाते भी हैं.
