वीरभूम के आदिवासी नेताओं ने सामूहिक दुष्कर्म की बात से इनकार किया

सूरी : बीरभूम जिले में हाल ही में 20 साल की लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार की वीभत्स घटना के बाद इलाके के आदिवासी नेताओं ने दावा किया है कि लड़की ने गांव प्रधान (मोरेल) को फंसाने के लिए झूठ बोला था और संथाल समुदाय की परंपरागत न्याय व्यवस्था को मीडिया बदनाम कर रहा […]

सूरी : बीरभूम जिले में हाल ही में 20 साल की लड़की के साथ कथित सामूहिक बलात्कार की वीभत्स घटना के बाद इलाके के आदिवासी नेताओं ने दावा किया है कि लड़की ने गांव प्रधान (मोरेल) को फंसाने के लिए झूठ बोला था और संथाल समुदाय की परंपरागत न्याय व्यवस्था को मीडिया बदनाम कर रहा है. अलग अलग जिलों के कम से कम 20 संथाल संगठनों ने गत रविवार को आदिवासी बहुल अंगरगरिया गांव में सभा बुलाई थी.

भारत जकात माझी मरोआ नामक संगठन की बीरभूम जिला इकाई ने सभा का आयोजन किया जिसमें लाभपुर गांव की कुछ महिलाएं भी शामिल हुईं जहां सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था. संथाल नेताओं ने कहा कि वे अपनी सालों पुरानी न्याय व्यवस्था के पक्ष में जनता की रायशुमारी शुरु करेंगे.आरोपों के मुताबिक बीरभूम जिले की खाप पंचायत ने दूसरी जाति के लड़के के साथ संबंधों के चलते लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार का फरमान जारी किया था. हालांकि संथाल समुदाय के लोग बलात्कार होने की ही बात से इनकार कर रहे हैं.

संगठन के नेता ओपल मुरदी ने कहा, ‘‘यह सच है कि गांव वालों ने महिला और उसके प्रेमी को घर से खींचा जहां उन्हें आपत्तिजनक अवस्था में देखा गया थालेकिन मोरेल ने ऐसी कोई अदालत नहीं लगाई जहां महिला के साथ दुष्कर्म का आदेश पारित किया गया था’’

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