कोलकाता: मध्यमग्राम दुष्कर्म कांड के खिलाफ एक बार फिर बुद्धिजीवी सड़क पर उतर कर अपना विरोध जतायेंगे. शनिवार को कॉलेज स्क्वायर से बुद्धिजीवियों व नागरिक समाज के करीब 21 संगठनों द्वारा विरोध रैली निकाली जायेगी.
गौरतलब है कि दुष्कर्म व पीड़िता की हत्या को लेकर राजनीति, शिक्षा व साहित्य जगत से जुड़े लोगों का विरोध लगातार जारी है. साहित्य जगत से जुड़े कुछ विशिष्ट लोगों ने सवाल उठाया है कि इतनी वीभत्स घटना के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न ही कोई अपनी प्रतिक्रिया दी है और न ही पीड़ित परिजनों के साथ ही राज्य सरकार खड़ी नजर आ रही है.
वरिष्ठ पत्रकार गीतेश शर्मा ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों पर होनेवालीं ऐसी आपराधिक व अमानवीय घटनाएं बंगाल में 70-80 के दशक में नहीं हुईं. 90 के दशक में ऐसी घटनाएं सामने आने लगीं, लेकिन अब तो ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं.
बुद्धिजीवी का काम केवल लिखना-पढ़ना ही नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उन्हें समाज और देश के हित के लिए सड़क पर उतर कर विरोध भी करना पड़ता है. बाबा नागाजरुन समेत कई ऐसे विशिष्ट लोगों के उदाहरण हैं, जो आजादी के पहले और उसके बाद भी जेल गये थे. बंगाल में हर चीजों को राजनीति से जोड़ दिया जाता है लेकिन बात यदि महिलाओं की सुरक्षा व राज्य की अस्मिता की हो, तो राजनीति से ऊपर उठ कर विचार करना चाहिए. उन्होंने दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है.
इधर चित्रकार समीर आइच का कहना है कि मध्यमग्राम कांड जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन को सख्त व सक्रिय होना होगा. एसयूसीआइ की महिला इकाई एआइएमएसएस की सचिव रूना पुरकायस्थ ने भी पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की मांग की है.
