कोलकाता: आंकड़ों के संग्रहण में प्रामाणिकता की जरूरत पर बल देते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अच्छे आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि राष्ट्रीय नीतियों के निर्धारण में आंकड़ों के विश्लेषण की प्रमुख भूमिका होती है. उन्होंने कहा, ‘विशेष तौर पर सामाजिक क्षेत्र में हमारी नीतियों की प्रभावोत्पादकता विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा अच्छी गुणवत्तावाले आंकड़ों के संग्रह पर निर्भर करती है. अच्छी नीतियों के लिए आंकड़ों के अच्छे मानकों की आवश्यकता होती है.’
मुखर्जी ने यहां भारतीय सांख्यिकी संस्थान के 48वें दीक्षांत समारोह में कहा, ‘इसलिए ज्यादा जोर सूचना संग्रह की प्रामाणिकता पर दिया जाना चाहिए ताकि नीतिगत हस्तक्षेप का आधार तैयार किया जा सके.’ राष्ट्रपति ने कहा कि आंकड़ा संग्रह अधिनियम 2008 में विभिन्न मानकों पर सामाजिक-आर्थिक को सुगम बनाने की व्यवस्था है.
इस अधिनियम के तहत नागरिकों और सूचना जुटानेवाले कर्मियों की यह साझा जिम्मेदारी है सही और पर्याप्त आंकड़े दिये जायें. राष्ट्रपति ने बड़े आंकड़ों के विश्लेषण और निष्कर्ष निकालने में सतर्कता बरतने की सलाह दी.
