भूमि टैक्स बढ़ेगा

कोलकाता: आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने अब जमीन का टैक्स बढ़ाने का फैसला किया है. वर्ष 1953 में केंद्र सरकार ने जमींदारी प्रथा को खत्म करने के लिए कानून पारित किया था. कानून पारित होने के 60 वर्ष बाद भी कोलकाता में यह कानून लागू नहीं हो पाया है. कोलकाता नगर निगम के […]

कोलकाता: आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने अब जमीन का टैक्स बढ़ाने का फैसला किया है. वर्ष 1953 में केंद्र सरकार ने जमींदारी प्रथा को खत्म करने के लिए कानून पारित किया था. कानून पारित होने के 60 वर्ष बाद भी कोलकाता में यह कानून लागू नहीं हो पाया है. कोलकाता नगर निगम के अंतर्गत एक से 100 नंबर वार्ड अर्थात उत्तर में सिंथी मोड़ से लेकर दक्षिण में नाकतला तक अब तक कानून राज्य सरकार लागू नहीं कर पायी है.

आज भी राज्य सरकार को यहां से किसी प्रकार का कोई खजाना टैक्स नहीं मिलता है. वहीं, निगम के 100 से 141 नंबर वार्ड के लोगों को यह सुविधा नहीं है. इन क्षेत्रों में निगम द्वारा सुविधाएं भले ही पर्याप्त मात्र में ना मिलती हों, लेकिन यहां के लोग निगम के कर के साथ ही खजाना का टैक्स भी देते हैं. कोलकाता में रहनेवाले लोगों को सुविधाएं अधिक मिलती हैं, लेकिन वे खजाना टैक्स नहीं देते हैं.

इसलिए राज्य सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स ने इस क्षेत्र के लोगों से भी जमीन टैक्स लेने की सिफारिश की है. टास्क फोर्स ने सिर्फ कोलकाता हीं नहीं, पूरे राज्य में जमीन कर का परिमाण बढ़ाने की सिफारिश की है. उनका कहना है कि जमीन कर का परिमाण बढ़ाने से राज्य सरकार की आमदनी बढ़ेगी, साथ ही साधारण लोगों को भी अधिक सुविधाएं मुहैया करायी जा सकेंगी. अगर इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो प्रत्येक वर्ष राज्य सरकार की आमदनी में 1500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी. कोलकाता में रहनेवाले लोगों से जमीन टैक्स वसूलने के लिए वाम मोरचा सरकार ने वर्ष 2003 में कानून भी बनाया था, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया जा सका है.

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