3000 करोड़ का ताला बाजार

कोलकाता: जमाना भले ही बदल गया है, नयी तकनीक आ गयी है, लेकिन आज भी घरों की सुरक्षा के लिए तालों पर ही लोग सबसे अधिक भरोसा करते हैं. यह और बात है कि अब तालों की शक्ल बदलती जा रही है. आधुनिक तकनीक के कारण अब बाजार में बगैर चाबीवाले ताले लोकप्रिय होने लगे […]

कोलकाता: जमाना भले ही बदल गया है, नयी तकनीक आ गयी है, लेकिन आज भी घरों की सुरक्षा के लिए तालों पर ही लोग सबसे अधिक भरोसा करते हैं. यह और बात है कि अब तालों की शक्ल बदलती जा रही है. आधुनिक तकनीक के कारण अब बाजार में बगैर चाबीवाले ताले लोकप्रिय होने लगे हैं. भारत में तालों का बाजार 3000 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है.

यह उद्योग प्रत्येक वर्ष 14 प्रतिशत की रफ्तार से विकास कर रहा है. यूं तो तालों के इस बाजार में बड़ी-बड़ी देसी-विदेशी कंपनियां भी कूद चुकी हैं, लेकिन आज भी तालों के बाजार पर असंगठित क्षेत्र का ही वर्चस्व है. जर्मनी की मशहूर ताला कंपनी आबुस के डायरेक्टर कौशिक मलिक (नेशनल सेल्स एंड मार्केटिंग) ने बताया कि बड़ी कंपनियां तेजी से अपने कदम जमा रही हैं, लेकिन अभी भी असंगठित क्षेत्र का ताला उद्योग के 65 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है. दो वर्ष पहले भारत में कदम रखनेवाली आबुस का वार्षिक कारोबार 50 करोड़ रुपये के करीब जा पहुंचा है.

इसमें पूर्वी भारत की हिस्सेदारी लगभग 15 करोड़ रुपये है. श्री मलिक ने बताया कि घरों की सुरक्षा के मुद्दे पर आज भी भारतीय बढ़ई, ठेकेदार एवं इंटिरियर डिजाइनर से प्रभावित हैं. उनके परामर्श के आधार पर ही अपने घरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. श्री मलिक ने बताया कि व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी कंपनियां पुलिस विभाग एवं ट्रेवल एजेंटों की सहायता भी ले रही हैं. भारत में प्रत्येक वर्ष करोड़ों लोग पर्यटन पर निकलते हैं. सफर के दौरान जिनका अधिकतर समय ध्यान अपने सामान की सुरक्षा पर बना रहता है. कंपनी के जर्मन विशेषज्ञ जोनाथन जॉर्ज ने बताया कि भारत एवं जर्मन के लोगों के सोच में जमीन-आसमान का फर्क है. वहां के लोग एक-दूसरे पर नहीं के बराबर भरोसा करते हैं. इसलिए वह अपने घरों, वाहनों, सामान में ताला लगाये बगैर कहीं भी आना-जाना पसंद नहीं करते हैं, लेकिन भारत का मामला अलग है. भारत में आज भी लोग अपने रिश्तेदार से अधिक पड़ोसी पर भरोसा करते हैं.

यहां के लोग किसी अपने के भरोसे अपने घर व वाहन को छोड़ कर काम पर चले जाते हैं. पर, धीरे-धीरे यहां के समाज में भी बदलाव आ रहा है. बढ़ते शहरीकरण के कारण लोगों का सोच बदल रहा है और उसके साथ ही ताला उद्योग भी बढ़ रहा है. फिलहाल ताला उद्योग 3000 करोड़ का है, लेकिन आनेवाले दिनों में इसमें जबरदस्त इजाफा होने की संभावना है. आयुस ने नये तालों की सीरीज में भारतीय बाजार के लिए अपना नया ताला की गैरेज लांच किया है. कंपनी का दावा है कि नंबर कोड वाला यह एक ऐसा मजबूत ताला है, जिसे गलत लोगों द्वारा खोलना लगभग असंभव है.

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