कोलकाता: हुगली जिले के सिंगूर में पंचायत चुनाव की गहमागहमी के बीच टाटा ग्रुप ने सोमवार को साफ कर दिया कि वह पश्चिम बंगाल कभी नहीं छोड़ेगा. टाटा ग्रुप के चेयरमैन सायरस मिस्त्री ने यहां टाटा ग्लोबल बेवरेज के 15वें एजीएम में सोमवार को कहा, ‘हमने पश्चिम बंगाल को नहीं छोड़ा है, कभी नहीं छोड़ेंगे.’ एजीएम के दौरान कंपनी के एक शेयरधारक ने जब सिंगूर की जमीन के भविष्य की योजना के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि टाटा कंपनी कभी भी बंगाल छोड़ कर नहीं जायेगी. कंपनी की छोटी कार नैनो के लिए अधिग्रहीत जमीन पर भविष्य में क्या होगा, इस संबंध में उन्होंने कुछ स्पष्ट नहीं किया.
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में वाममोरचा कार्यकाल के दौरान टाटा मोटर्स ने तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के कारण अपना नैनो प्रोजेक्ट गुजरात के सानंद में स्थानांतरित कर दिया.
तृणमूल कांग्रेस योजना के लिए अधिगृहीत 997 एकड़ जमीन में से 400 एकड़ जमीन किसानों को वापस करने की मांग कर रही थी. तृणमूल का कहना था कि जमीन सरकार ने टाटा कंपनी के लिए किसानों से जबरन ली थी. वर्ष 2008 से टाटा की यह परित्यक्त फैक्टरी वीरान पड़ी है. किसानों को उनकी जमीन अब तक वापस नहीं मिली है.
किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाने के लिए तृणमूल सरकार ने सिंगूर लैंड रिहैबिलिटेशन एंड डेवलपमेंट बिल, 2011 बना कर जमीन अपने कब्जे में ले लिया है, लेकिन राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ टाटा ग्रुप ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. हाइकोर्ट की एकल पीठ ने बिल को सही ठहराया, लेकिन डिवीजन बेंच ने इस विधेयक को अवैध करार दे दिया. इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान टाटा कंपनी से सिंगूर की जमीन के संबंध में भविष्य की योजनाओं के बारे में जवाब मांगा है. अगस्त महीने में मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी. टाटा ग्रुप के चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने संकेत दे दिया कि टाटा कंपनी सिंगूर की जमीन छोड़ने के पक्ष में नहीं है और कंपनी कभी भी बंगाल छोड़कर नहीं जायेगी.
