कोलकाता: तृणमूल सांसद तापस पॉल को कलकत्ता हाइकोर्ट से उस वक्त राहत मिली, जब सिंगल बेंच के आदेश पर गुरुवार दोपहर दो बजे तक स्थगनादेश लगा दिया गया. न्यायाधीश गिरीश चंद गुप्त व न्यायाधीश तपोव्रत चक्रवर्ती की अदालत में गुरुवार को फिर मामले की सुनवाई होगी. यानी गुरुवार दोपहर दो बजे से पहले तापस पॉल के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं करायी जा सकती है.
उल्लेखनीय है कि न्यायाधीश दीपंकर दत्त ने मामले की सुनवाई करते हुए तापस पॉल के खिलाफ सीआइडी जांच का आदेश देते हुए मामले में एफआइआर दर्ज करने के लिए कहा था. इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार व तापस की ओर से खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की गयी. राज्य सरकार की ओर से वकील कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बिजन घोष ने मामला दायर किया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस हाइकोर्ट में भेज दिया. राज्य सरकार इस संबंध में क्या कर सकती है.
तापस पॉल के वकील किशोर दत्त ने मुख्य आवेदनकारी की याचिका को स्वीकार करने पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला करनेवाले कृष्णनगर के नहीं, बल्कि दमदम के रहनेवाले हैं. तापस पॉल ने जब बयान दिया था, तब वह मौके पर नहीं थे. अखबारों की कटिंग देखकर उन्होंने मामला दायर किया है. तापस पॉल ने इस मामले में बकायदा विज्ञापन देकर माफी मांग ली है. इसपर न्यायाधीश ने आवेदनकारी के वकील अनिरुद्ध चटर्जी से पूछा कि मामले में अदालत में स्वीकारयोग्य अपराध कहां है. इसपर जवाब मिला कि अखबारों की कटिंग देखकर मामला दायर किया गया. लेकिन साथ ही वीडियो फुटेज भी जमा किया गया है. अदालत का कहना था कि यदि सांसद कहते हैं कि वह रिवॉल्वर लेकर घूमते हैं, तो एक सांसद रिवॉल्वर रख ही सकता है. इसमें अपराध कहां है. महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का जिक्र भी किया गया. याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि मामले में 153(1ए) धारा का प्रयोग किया जा सकता है. मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह 10.30 बजे फिर होगी.
