कोलकाता : पुलवामा में आतंकी हमले को लेकर पूरे देश में जन आक्रोश है. लेकिन यह देश में पहली आतंकी घटना नहीं है. इसके पहले भी देश में हुए कई आतंकी हमलों में देशवासियों ने अपनी गंवायी है. आतंकी और उनके संगठनों के लिए पनाहगार बना हमारे देश का पड़ोसी मुल्क सीधे तो लड़ाई करने की हिम्मत नहीं कर सकता है लेकिन उसका छद्म युद्ध जारी है.
ऐसे में देश आतंकियों के खिलाफ जारी मुहिम और तेज करनी होगी. थल, जल और नभ सेना को पूरी छूट बरकरार रखी जाये. सही रणनीति के तहत आतंकियों और उसे पनाह देने वाले देश के खिलाफ कार्रवाई हो. यह मांग प्रभात खबर जन संवाद में विशिष्ट लोगों ने की.
परिचर्चा का विषय ‘देश में आतंकी हमले : आम लोगों की राय में स्थायी समाधान’ था. परिचर्चा का आयोजन सेंटर फार सोशल ट्रांसफार्मेशन और ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन आफ इंडिया के सहयोग से बैरकपुर के काजीपाड़ा, नया पल्ली इलाके में संपन्न हुआ. आइये जानते हैं परिचर्चा के दौरान लोगों की कही बातें –
निशांत कुमार (सेंटर फार सोशल ट्रांसफार्मेशन के अध्यक्ष) : पुलवामा में आतंकी हमला और उसके बाद भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की शर्मशार हुआ है. इसके बावजूद उसके रवैये में कोई परिवर्तन की उम्मीद नहीं की जा सकती है.
वह भारत से सीधे लड़ाई करने की हिम्मत तो नहीं कर सकता है लेकिन उसके छद्म युद्ध जारी है. आतंकियों का पनाहगार बने पाकिस्तान और आतंकियों संगठनों के खिलाफ भारत को सही रणनीति के साथ लड़ाई जारी ही नहीं बल्कि और तेज करनी होगी.
मोहम्मद अब्दुल खलीफा (ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन आफ इंडिया के अध्यक्ष) : आतंकवाद पूरी मानव जाति को प्रभावित कर रहा है. ये बहुत ही डरावनी बीमारी है जो लोगों को मानसिक और बौद्धिक स्तर पर प्रभावित कर रही है.
चाहे ये छोटे देशों में होता हो या बड़े देशों में, ये दोनों ही जगह चुनौती के के समान है. आतंकियों और उन्हें पनाह देने वाले दोनों सजा के समान हकदार हैं. ऐसे में भारत को आतंकवाद के खिलाफ और सख्त होने की जरूरत है.
डीआर खान (सामाजिक कार्यकर्ता) : कूटनीति में पड़ोसी देश के साथ बेहतर संबंधों के लिए सम्पर्क में रहना जरूरी होता है, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान से किसी तरह का सम्पर्क संभव नहीं है.
ऐसे प्रयासों के लिए अच्छे एवं नेक इरादे की जरूरत होती है और पाकिस्तान से नेक इरादे की कल्पना नहीं की जा सकती. आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. आतंकवाद के खिलाफ भारत अपनी लड़ाई और तेज करे.
नौशाद अली (अधिवक्ता) : इतिहास गवाह है कि अधूरी लड़ाइयां विजेताओं के लिए घातक साबित हुई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने यकीनन इस तथ्य पर विचार कर रखा है. यही वजह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की घोषणा के बाद अपने पहले सार्वजनिक भाषण में उन्होंने कहा कि आज एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ.
मतलब साफ है कि देश की सरकार इस जद्दोजहद को उसके अंजाम तक ले जाने के लिए तैयार है. हमारे देश को आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिये अपनी लड़ाई और तेज करनी होगी.
अरमान अली : आतंकवाद पाकिस्तान की नीति का हिस्सा बन चुका है. वह पड़ोसी देशों में चरमपंथ और आतंकवादी तत्वों को बढ़ावा देता रहा है. पाकिस्तान में ऐसी सरकार है जिसके बारे में कहा जाता है कि वह सेना के समर्थन से बनी है. वहां आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है और भारत को उसके खिलाफ अपनी मुहिम और तेज करनी चाहिए.
शुभ्रा मंडल : आज, आतंकवाद एक सामाजिक मुद्दा बन चुका है. इसका इस्तेमाल आम लोगों और सरकार को डराने-धमकाने के लिये हो रहा है. लोगों का समूह जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं उन्हें आतंकवादी कहते हैं. आतंकवाद को परिभाषित करना बहुत आसान नहीं है क्योंकि इसने अपनी जड़ें बहुत गहराई तक जमाये हुए हैं. भारत को उन जड़ों को खत्म करने की जरूरत है.
शिवधनी राजभर : आतंकवाद की समस्या को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलझाने की जरुरत है. हमें इसे जड़ से खत्म करने के बारे में सोचना होगा. मानव मस्तिष्क से असाधारण आतंक को हटाने के साथ ही इसके साम्राज्य को पूरी तरह से नेस्तानाबूद करने के लिये हमें एक मजबूत नीति बनानी चाहिये.
आतंकवाद अपने सकारात्मक परिणामों को पाने के लिये हिसांत्मक तरीका अपनाता है. आतंकवाद एक हिंसात्मक कुकृत्य है जिसको अंजाम देने वाले समूह को आतंकवादी कहते हैं. उनके संगठन और उन्हें समर्थन देने वालों के खिलाफ देश को सही रणनीति के साथ लड़ाई और तेज करने की जरूरत है.
परिचर्चा के दौरान विनोद कुमार सिंह, रमेश सिंह, एसके अली, राजेश कुमार मिश्रा, ज्योर्तिमय भट्टाचार्य, प्रदीप हालदार, अभिजीत विश्वास, विनोद कुमार साव, किशन पाल बाल्मिकि, मोहम्मद मुस्लिम, शेख शहजादा और शेख नसीम समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.
