कोलकाता: मालदा के माणिकचक में दुष्कर्म कांड से जुड़े सालिसी सभा में जो प्रधान मौजूद थे उनके नाम अदालत को बताने होंगे. राज्य सरकार को यह नाम छह हफ्ते के भीतर अदालत को बताने होंगे.
कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्र व न्यायाधीश जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी कहा है कि पीड़िता को मुआवजा दिये जाने पर विशेष नजर रखी जायेगी.
उल्लेखनीय है कि मालदा के माणिकचक के भूतनी गांव में गत 31 मार्च को एक गृहिणी के साथ दुष्कर्म हुआ था. जब पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज कराने का निश्चय किया तो गांववालों ने उसे रोक दिया और सालिसी सभा के जरिये न्याय दिलाने का भरोसा दिया.
सालिसी सभा में आरोपी युवक को सजा के तौर पर गृहणी के पैर छूकर क्षमा मांगने का निर्देश दिया गया. इसे ‘सजा’ को जब गृहणी ने मानने से इनकार किया था तो सभा के प्रधानों ने उसके चरित्र को लेकर उंगली उठायी थी. घर आकर महिला ने खुद के शरीर में आग लगा ली थी. अगले दिन अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था. अखबारों में जब इस बाबत खबर निकली तो हाइकोर्ट के वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया. तब अदालत ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया.
