बोलपुर में गीतबीतान प्रोजेक्ट के लिए जमीन हस्तांतरण पर रोक

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना थीम सिटी प्रोजेक्ट को हाइकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. गुरुवार को कलकत्ता हाइकोर्ट ने वीरभूम जिले के बोलपुर में बनाने जानेवाले गीताबीतान थीम सिटी प्रोजेक्ट के लिए जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. ऐसा ही निर्देश कलकत्ता हाइकोर्ट की कार्यनिर्वाही मुख्य न्यायाधीश निशिथा म्हात्रे […]

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना थीम सिटी प्रोजेक्ट को हाइकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. गुरुवार को कलकत्ता हाइकोर्ट ने वीरभूम जिले के बोलपुर में बनाने जानेवाले गीताबीतान थीम सिटी प्रोजेक्ट के लिए जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. ऐसा ही निर्देश कलकत्ता हाइकोर्ट की कार्यनिर्वाही मुख्य न्यायाधीश निशिथा म्हात्रे व न्यायाधीश तपोव्रत चक्रवर्ती डिवीजन बेंच ने दिया है.
क्या है मामला : बोलपुर में हिडको द्वारा अधिकृत जमीन पर राज्य सरकार गीतबीतान प्रोजेक्ट तैयार करना चाहती है, जिस पर कुछ जमीन दाताओं ने आपत्ति जतायी है. इसके बाद ही मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने फिलहाल जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगा दी है. गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट में राज्य सरकार के महाधिवक्ता किशोर दत्त ने कहा कि आगामी सोमवार को वह अदालत में सरकार का पक्ष रखेंगे. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि नये आवेदन पत्र अगर जमा भी हुए, तो उन्हें फिलहाल स्वीकार नहीं किया जायेगा.
गाैरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2001 में औद्योगिक नगरी बनाने के लिए बोलपुर में 300 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. वाममोर्चा कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने उस जमीन की कीमत 68 हजार प्रति बीघा तय की थी और जमीनदाताओं को 48 हजार प्रति बीघा रुपया दिया गया. लेकिन कई लोगों ने रुपया लेने से इनकार कर दिया.

इसके बाद वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उक्त 300 एकड़ जमीन में से 131 एकड़ जमीन पर गीताबीतान थीम सिटी प्रोजेक्ट बनाने की घोषणा की. इसके साथ ही उन्होंने उक्त जमीन पर 20 एकड़ में विश्वभारती के तर्ज पर विश्वबांग्ला विश्वविद्यालय की स्थापना करने की भी घोषणा की. इसके अलावा 50 एकड़ जमीन पर विश्व सूक्ष्म व लघु बाजार व 10 एकड़ जमीन पर आइटी हब की स्थापना करने की योजना बनायी है. वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 16 वर्ष से जमीन खाली पड़ी हुई थी, कोई औद्योगिक नगरी यहां नहीं बनी और न ही रोजगार के अवसरों की सृष्टि हुई. अब यहां उद्योग की बजाय आवासीय प्रोजेक्ट व विश्वविद्यालय बनाया जा रहा है, इसलिए उन लोगों ने जमीन वापस देने की मांग की है.

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