Land Registration : उत्तर प्रदेश में जमीन-जायदाद को लेकर होने वाले झगड़ों पर अब लगाम लग सकती है. धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने कैबिनेट (10 मार्च को बैठक हुई) में बड़ा फैसला लिया है. अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसके असली मालिक और सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच होगी. माना जा रहा है कि इससे भू-माफियाओं पर इसका असर पड़ेगा और लोगों की मेहनत की कमाई ठगी से बच सकेगी.
जमीन की खरीद-फरोख्त के मामलों में अक्सर कोई न कोई समस्या सामने आती रहती है. रजिस्ट्री होने के बाद खरीदार को पता चलता है कि जमीन विवादित है. उस पर किसी और का दावा है या फिर दस्तावेजों में गड़बड़ी है. ऐसे मामलों में कई बार लोगों को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है. उनकी मेहनत की कमाई दांव पर लग जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री से पहले ही कागजात और मालिकाना हक की जांच होने से ऐसे जोखिम काफी हद तक कम हो सकते हैं.
प्रॉपर्टी विशेषज्ञ क्या कहते हैं मामले को लेकर?
प्रॉपर्टी विशेषज्ञ प्रदीप मिश्रा का कहना है कि सरकार का यह फैसला आगे चलकर जमीन से जुड़े विवादों को काफी हद तक कम कर सकता है. अगर रजिस्ट्री से पहले ही जमीन की असली स्थिति और कागजात की सही तरह से जांच हो जाएगी, तो फर्जी सौदे, डुप्लीकेट दस्तावेज और धोखाधड़ी के मामले अपने आप कम हो जाएंगे. इससे जमीन खरीदने वाले लोगों को भी भरोसे के साथ निवेश करने का माहौल मिलेगा.
प्रॉपर्टी बाजार ज्यादा भरोसेमंद होगा इस फैसले से
योगी सरकार पहले से ही भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अवैध कब्जे हटाने के अभियान पर जोर दे रही है. ऐसे में रजिस्ट्री से पहले जमीन के कागजात और मालिकाना हक की जांच की नई व्यवस्था इस अभियान को और मजबूत बनाएगी. माना जा रहा है कि आने वाले समय में इससे आम लोगों को जमीन से जुड़े जोखिमों से राहत मिलेगी और प्रॉपर्टी बाजार ज्यादा भरोसेमंद बन सकेगा.
