UP Politics: लखनऊ में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित 'हिंदू गौरव दिवस' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सपा गिरगिट की तरह रंग बदलती है और उसके बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. योगी ने कहा कि सपा के PDA में 'P' का मतलब पहले पिछड़ा था, फिर पंडित हो गया और एक दिन पाकिस्तान भी कर दिया जाएगा. मुख्यमंत्री ने इस दौरान सपा की राजनीति और उसके नेताओं के बयानों पर भी सवाल उठाए.
अखिलेश यादव ने 'एकरंगी' कहकर किया पलटवार
मुख्यमंत्री के बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए पलटवार किया. उन्होंने लिखा, "एकरंगी क्या जानें, पीडीए के बहुरंग." अखिलेश ने भाजपा नेताओं पर PDA की उपेक्षा करने का आरोप लगाया और कहा कि PDA सामाजिक विविधता और अलग-अलग वर्गों की भागीदारी का प्रतिनिधित्व करता है. इस बयान के बाद यूपी की सियासत में PDA को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं.
कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि का मुद्दा भी उठाया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह के राजनीतिक योगदान और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह दबाव में नहीं आते थे और उनका स्पष्ट मानना था कि वे टूट सकते हैं, लेकिन झुक नहीं सकते. योगी ने कहा कि कल्याण सिंह ने सत्ता की चिंता किए बिना रामभक्तों पर गोली नहीं चलाने का फैसला लिया था. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को सनातन मूल्यों और हिंदू गौरव के लिए समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उनके प्रति श्रद्धावान होना सनातनियों का दायित्व है.
'महापुरुषों का अपमान करना सपा की आदत'
सीएम योगी ने सपा पर महापुरुषों के अपमान का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि कन्नौज में डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर बने सरकारी मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटाया गया था, जिसे उनकी सरकार ने दोबारा बाबा साहेब के नाम पर किया. योगी ने मैनपुरी में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम से जुड़े कॉलेज का नाम बदले जाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि महापुरुषों के सम्मान और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समाज को जागरूक रहना होगा.
2027 से पहले तेज हो रही सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां सपा की नीतियों और उसके PDA फार्मूले पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव सामाजिक प्रतिनिधित्व और PDA के मुद्दे को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक हथियार के तौर पर आगे बढ़ा रहे हैं. ऐसे में दोनों दलों के बीच आने वाले समय में इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है.
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