फीस, हॉस्टल और खाना सब मुफ्त! UP में इन बच्चों के लिए योगी सरकार की योजना, जानिए आवेदन करने की प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण श्रमिकों और कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय योजना शुरू की है. इस योजना के तहत पात्र बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा, भोजन, यूनिफॉर्म और किताबें जैसी सुविधाएँ दी जाती हैं. जानें योजना के बारे में विस्तार से.

Atal Awasiya Vidyalaya Yojana : उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अटल आवासीय विद्यालय योजना शुरू की है. इस योजना के तहत पात्र बच्चों को कक्षा 6 से 12 तक मुफ्त आवासीय शिक्षा दी जाती है. बच्चों की पढ़ाई के साथ रहने, खाने, यूनिफॉर्म, किताबें और खेलकूद जैसी सुविधाओं का खर्च भी सरकार उठाती है.

2022 में शुरू हुई योजना, हर मंडल में एक स्कूल

अटल आवासीय विद्यालय योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गयी थी. इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, जिनके माता-पिता निर्माण कार्य जैसे अस्थायी रोजगार से जुड़े हैं और काम के सिलसिले में उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पलायन करना पड़ता है. योजना का संचालन श्रम एवं रोजगार विभाग के तहत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UPBOCW) द्वारा किया जाता है. प्रदेश में हर मंडल मुख्यालय पर एक अटल आवासीय विद्यालय संचालित किया जा रहा है.

कक्षा 6 और 9 में मिलता है दाखिला

अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश मुख्य रूप से कक्षा 6 और कक्षा 9 में दिया जाता है. चयनित विद्यार्थियों को उसी विद्यालय में कक्षा 12 तक पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलता है. इन स्कूलों में CBSE मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जाती है. इस तरह बच्चों को सरकारी स्तर पर आवासीय स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है.

किन बच्चों को मिलता है योजना का लाभ?

अटल आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए कुछ निर्धारित पात्रता शर्तें हैं. योजना का प्रमुख लाभ पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को मिलता है.

  • UPBOCW में कम से कम एक वर्ष से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चे पात्र हैं.
  • अनाथ बच्चों को भी योजना में शामिल किया गया है.
  • कोविड-19 के दौरान महिला कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित बच्चों को भी पात्रता दी गयी है.
  • एक परिवार से अधिकतम दो बच्चे आवेदन कर सकते हैं.
  • पंजीकृत श्रमिक होने की शर्त के अलावा अलग से आय सीमा निर्धारित नहीं है.
  • विद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित हैं.

पढ़ाई के साथ रहने और खाने की भी मुफ्त व्यवस्था

इन विद्यालयों में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई की सुविधा ही नहीं मिलती, बल्कि उनके रहने और दैनिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है. परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल बनाए गये हैं. इसके अलावा डाइनिंग हॉल, ऑडिटोरियम, खेलकूद की सुविधाएं और सिक रूम जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं. कई परिसरों में रेजिडेंट नर्स और शिक्षकों के लिए आवास की व्यवस्था भी की गयी है. सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को एक सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल देना है, जहां उन्हें आर्थिक परेशानियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने की जरूरत न पड़े.

18 विद्यालयों का संचालन

उत्तर प्रदेश में कुल 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित किये जा रहे हैं. प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर एक विद्यालय स्थापित किया गया है. इनमें से 16 विद्यालयों के निर्माण पर करीब 1,115 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे. सितंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन 16 विद्यालयों को राष्ट्र को समर्पित किया था.

जनवरी-फरवरी में जारी होती है प्रवेश प्रक्रिया

अटल आवासीय विद्यालयों में दाखिले के लिए हर वर्ष आमतौर पर जनवरी के अंत से फरवरी के मध्य तक प्रवेश संबंधी सूचना जारी की जाती है. कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जाती है. अभिभावक प्रवेश के लिए आवेदन पत्र upbocw.in से प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा जिला श्रम कार्यालय से भी आवेदन संबंधी जानकारी और फॉर्म हासिल किये जा सकते हैं.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदन करते समय सामान्य तौर पर बच्चे का आधार कार्ड और माता-पिता का यूपी लेबर कार्ड या निर्माण श्रमिक पंजीकरण संबंधी दस्तावेज जरूरी होते हैं. पात्रता और उस वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में देखना जरूरी है.

क्यों खास है यह योजना?

अटल आवासीय विद्यालय योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के लिए अपने माता-पिता के काम और पलायन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. मुफ्त शिक्षा, आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं के कारण ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए आगे की पढ़ाई का रास्ता आसान होता है.

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By रवि रंजन कुमार

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