UP Land Registration Rules: उत्तर प्रदेश में जमीन या मकान खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का बड़ा सपना होता है. लेकिन रजिस्ट्री से जुड़े नियमों की अनदेखी आपको कानूनी पचड़े में डाल सकती है. यूपी सरकार ने भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा रोकने और दस्तावेजों की जांच को मजबूत करने के लिए कई नियम लागू किए हैं. अगर आप यूपी में जमीन या मकान खरीदने जा रहे हैं, तो रजिस्ट्री से पहले इन 5 महत्वपूर्ण नियमों को जरूर समझ लें.
आधार बायोमेट्रिक सत्यापन हुआ अनिवार्य
जमीन की रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य किया गया है. रजिस्ट्री के समय खरीदार और विक्रेता दोनों को उप-निबंधक कार्यालय में मौजूद रहकर अपना बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा. इसमें फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन के जरिए पहचान की पुष्टि की जाती है. बड़े लेन-देन के लिए पैन कार्ड भी जरूरी दस्तावेजों में शामिल है. डिजिटल सत्यापन के बिना रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.
पारिवारिक रिश्ते साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज
पारिवारिक संपत्ति के ट्रांसफर या सेटलमेंट के दौरान केवल आधार कार्ड को रिश्ते के कानूनी प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. आधार कार्ड पहचान और पते के प्रमाण के रूप में मान्य रहेगा. वहीं, रिश्ते की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल की मार्कशीट या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जैसे सरकारी दस्तावेज देने पड़ सकते हैं. खासकर माता-पिता या जीवनसाथी से संपत्ति ट्रांसफर के मामलों में इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है.
मालिकाना हक और भारमुक्त प्रमाणपत्र की जांच जरूरी
- प्रॉपर्टी डीलर या विक्रेता की मौखिक बातों पर भरोसा करने के बजाय जमीन के सरकारी रिकॉर्ड की जांच करें. भारमुक्त प्रमाणपत्र (Encumbrance Certificate-EC) से यह पता लगाया जा सकता है कि जमीन पर कोई पुराना बैंक लोन, मॉर्टगेज या अन्य भार तो नहीं है. जमीन की पुरानी स्थिति जानने के लिए पिछले 15 से 30 वर्षों का EC निकालने की सलाह दी गई है.
- चेन ऑफ डीड्स की जांच करें, ताकि पता चल सके कि वर्तमान मालिक के पास जमीन किस तरह पहुंची और इससे पहले इसके कितने खरीदार- विक्रेता रहे हैं.
सह-खातेदारों की लिखित सहमति या NOC लें
अगर आप ऐसी जमीन खरीद रहे हैं, जिसके एक से अधिक मालिक या हिस्सेदार हैं, तो अतिरिक्त सावधानी बरतें. संयुक्त परिवार की जमीन या भाइयों के नाम दर्ज संपत्ति के मामले में अन्य सभी सह-खातेदारों की लिखित सहमति या NOC की जांच करें. बिना सभी हिस्सेदारों की सहमति के किसी एक व्यक्ति से पूरी जमीन खरीदने पर भविष्य में विवाद खड़ा हो सकता है और दूसरे हिस्सेदार अदालत का रुख कर सकते हैं.
खसरा नंबर और चौहद्दी का करें सटीक मिलान
- रिकॉर्ड का मिलान: रजिस्ट्री डीड में दर्ज खसरा नंबर, खाता संख्या और जमीन की चौहद्दी (चारों दिशाओं की सीमाएं) सरकारी भूलेख रिकॉर्ड से हूबहू मिलनी चाहिए.
- सुधार विलेख: यदि रजिस्ट्री होने के बाद कोई गलती सामने आती है, तो उसे सुधारने के लिए सुधार विलेख (ततीम्मा) कराना पड़ता है, जिसमें दोबारा विक्रेता की उपस्थिति और लंबी कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होती है.
खरीदार ऐसे कर सकते हैं पहले से तैयारी
समय और परेशानी से बचने के लिए खरीदार उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक IGRSUP पोर्टल igrsup.gov.in पर जाकर स्टांप शुल्क की गणना कर सकते हैं. इसके अलावा रजिस्ट्री से जुड़े विवरण पहले से ऑनलाइन भरने और अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक करने की सुविधा भी उपलब्ध है. जमीन खरीदने से पहले दस्तावेज, मालिकाना हक और सरकारी रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है, ताकि भविष्य में आपका पैसा और संपत्ति किसी विवाद में न फंसे.
