UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं. भाजपा ने अब चुनावी रणनीति को सिर्फ बूथ और घर-घर संपर्क तक सीमित रखने के बजाय सोशल मीडिया को भी संगठन के अभियान से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी के कार्यकर्ता अब सरकार की योजनाओं और स्थानीय विकास कार्यों की सक्सेस स्टोरी पर रील बनाएंगे, जिन्हें सोशल मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाया जाएगा. इनमें से चुनिंदा रील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करेंगे. यह पूरा अभियान 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत चलाया जाना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान 17 अक्टूबर तक चलाने की तैयारी है. भाजपा इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की जमीनी और डिजिटल ताकत परखने की कवायद के तौर पर देख रही है.
27 हजार से अधिक शक्ति केंद्र, हर जगह बनेगी रील
भाजपा के डिजिटल प्लान का सबसे अहम हिस्सा शक्ति केंद्र हैं. रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश के 27 हजार से अधिक शक्ति केंद्रों को कम से कम 10-10 रील तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है. इन रील में किसी सरकारी योजना से लाभ पाने वाले व्यक्ति की कहानी, स्थानीय विकास कार्य या सरकार की उपलब्धि को करीब एक मिनट के वीडियो में दिखाने की योजना है. वीडियो में लाभार्थी का नाम, स्थान, जिला, योजना और उससे हुए बदलाव जैसी जानकारी शामिल की जाएगी. यानी भाजपा अब योजनाओं का प्रचार सिर्फ नेताओं के भाषण के जरिए नहीं, बल्कि लाभार्थी की जुबानी कहानी के रूप में सोशल मीडिया तक पहुंचाना चाहती है.
25 हजार डिजिटल कहानियों पर रहेगा फोकस
पार्टी की योजना बड़ी संख्या में तैयार होने वाली इन रील और सक्सेस स्टोरी को डिजिटल स्तर पर व्यवस्थित करने की है. रिपोर्टों के मुताबिक इनमें से करीब 25 हजार कहानियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. इसके लिए प्रदेश और जिला स्तर पर डिजिटल व्यवस्था तैयार करने की योजना है. इससे पार्टी के पास अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों की सरकार की योजनाओं से जुड़ी स्थानीय कहानियों का डिजिटल डाटा तैयार होगा.
योगी शेयर करेंगे चुनिंदा रील
इस रणनीति का सबसे दिलचस्प हिस्सा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा है. भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से तैयार की गई रील में से चुनिंदा बेहतर कंटेंट मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से भी साझा किया जाएगा. इसका सीधा फायदा यह होगा कि स्थानीय कार्यकर्ता की बनाई सामग्री प्रदेश स्तर के बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है. पार्टी की कोशिश है कि इससे कार्यकर्ताओं में भी डिजिटल कंटेंट तैयार करने को लेकर उत्साह बढ़े. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर कार्यकर्ता की हर रील मुख्यमंत्री खुद शेयर करेंगे. योजना चुनिंदा और प्रभावी कंटेंट को आगे बढ़ाने की है.
Gen-Z पर क्यों है भाजपा की नजर?
भाजपा की इस रणनीति में युवाओं और खासकर Gen-Z को जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई देता है. सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो और रील युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं. ऐसे में पार्टी पारंपरिक भाषण और पोस्टर से आगे बढ़कर उसी माध्यम में अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाना चाहती है, जहां युवा सबसे ज्यादा समय बिताते हैं. यही वजह है कि सेवा संकल्प अभियान के दौरान रील बनाने को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है.
बूथ के साथ डिजिटल नेटवर्क भी मजबूत करने की तैयारी
भाजपा की रणनीति सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है. पार्टी 2027 से पहले बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने पर भी जोर दे रही है. हालिया तैयारियों में बूथ संपर्क, लाभार्थियों तक पहुंच और कमजोर विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस की बात सामने आई है. इसका मतलब साफ है कि भाजपा 'बूथ + लाभार्थी + सोशल मीडिया' को एक साथ जोड़कर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है.
योगी का संदेश- सरकार के काम के भरोसे बैठना काफी नहीं
भाजपा की हालिया कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का संदेश दिया. रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि केवल सरकार के काम के भरोसे बैठकर चुनाव नहीं जीता जा सकता. संगठन को जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना होगा और विपक्ष की ओर से बनाए जा रहे नैरेटिव का जवाब तथ्यों के साथ देना होगा. यानी भाजपा के लिए 2027 का चुनाव सिर्फ सरकार की उपलब्धियां गिनाने का चुनाव नहीं होगा. पार्टी को उन उपलब्धियों को मतदाता तक पहुंचाने और उनके पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाने की भी चुनौती है.
सपा भी डिजिटल मोर्चे पर सक्रिय
भाजपा के इस डिजिटल प्लान के बीच विपक्ष भी सोशल मीडिया को नजरअंदाज नहीं कर रहा है. समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच हाल के दिनों में AI वीडियो और डिजिटल कंटेंट को लेकर राजनीतिक टकराव सामने आ चुका है. इससे साफ है कि 2027 की लड़ाई में सोशल मीडिया का महत्व लगातार बढ़ रहा है. अब मुकाबला केवल इस बात का नहीं रहेगा कि किस पार्टी के पास कितने कार्यकर्ता हैं, बल्कि यह भी मायने रखेगा कि किस पार्टी का डिजिटल संदेश कितनी तेजी से मतदाताओं तक पहुंचता है.
2027 की चुनावी रिहर्सल माना जा रहा अभियान
17 सितंबर से शुरू होने वाला सेवा संकल्प अभियान भाजपा के लिए एक तरह की चुनावी रिहर्सल भी माना जा रहा है. एक तरफ कार्यकर्ता घर-घर पहुंचेंगे, दूसरी तरफ स्थानीय स्तर की उपलब्धियों और लाभार्थियों की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंचेंगी.
ऐसे में पार्टी के सामने तीन लक्ष्य दिखाई देते हैं—
पहला, सरकार की योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाना. दूसरा, स्थानीय स्तर पर संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना. तीसरा, युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच पार्टी का डिजिटल नैरेटिव मजबूत करना.
असली परीक्षा 2027 में होगी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है. लेकिन डिजिटल लोकप्रियता को वोट में बदलना राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. भाजपा के सामने सरकार के काम को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कमजोर पड़े कुछ राजनीतिक क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती भी है. इसलिए 2027 के चुनाव से पहले भाजपा का यह डिजिटल प्रयोग सिर्फ रील बनाने की कवायद नहीं है. यह संगठन को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने और स्थानीय उपलब्धियों को बड़े राजनीतिक नैरेटिव में बदलने की रणनीति है.
अब देखना यह होगा कि 27 हजार से अधिक शक्ति केंद्रों से निकलने वाली रीलें यूपी के मतदाताओं का मूड कितना बदल पाती हैं और भाजपा का डिजिटल प्लान 2027 में वोट की मशीनरी में कितना बदलता है.
