'विश्वकर्मा श्रम सम्मान' से बदली UP के कारीगरों की जिंदगी! आधुनिक औजारों से पुश्तैनी हुनर को मिला नया मुकाम, जानें पूरा मामला

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को निखारने के लिए विशेष योजनाएं चला रही है. प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता से कुम्हार, मोची, दर्जी जैसे कारीगरों को सशक्त बनाया जा रहा है.

UP Self Employment Scheme: उत्तर प्रदेश में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं के तहत प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. इसका उद्देश्य कुम्हार, मोची, दर्जी, बढ़ई और लोहार जैसे पारंपरिक काम से जुड़े लोगों को बेहतर साधन देकर उनके कारोबार और आजीविका को मजबूत करना है. इससे पुश्तैनी हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने की कोशिश भी हो रही है.

तकनीक से आसान हुआ पारंपरिक काम

पारंपरिक कारीगर लंबे समय तक पुराने औजारों और सीमित संसाधनों के सहारे काम करते रहे हैं. आधुनिक उपकरण और कौशल प्रशिक्षण मिलने से काम की गति और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल रही है. कुम्हारों के लिए इलेक्ट्रिक चाक और दूसरे कारीगरों के लिए आधुनिक टूल्स जैसे साधन उनके काम को आसान बना रहे हैं.

प्रशिक्षण के साथ कारोबार बढ़ाने पर जोर

कारीगरों को सिर्फ प्रशिक्षण देने के बजाय उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के जरिए उन्हें अपने पारंपरिक हुनर को नए डिजाइन और तकनीक के साथ जोड़ने की जानकारी मिलती है. वहीं, पात्र लाभार्थियों को संबंधित सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता और ऋण की सुविधा भी मिल सकती है.

कुम्हारों के उत्पादों को मिल रहा नया बाजार

टेराकोटा और मिट्टी से बने पारंपरिक उत्पादों की मांग को देखते हुए कारीगर अब पुराने सामान के साथ नए डिजाइन के उत्पाद तैयार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं. दीये, मूर्तियां, गमले और सजावटी सामान जैसे उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ बड़े बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है. इससे पारंपरिक कला को कारोबार का नया आधार मिल सकता है.

नई पीढ़ी को पुश्तैनी हुनर से जोड़ने की कोशिश

पारंपरिक काम से युवाओं के दूर होने और रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की चुनौती के बीच आधुनिक तकनीक इस क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है. बेहतर उपकरण, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव मिलने पर युवा अपने परिवार के पारंपरिक कारोबार को नए तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.

लक्ष्य आत्मनिर्भर बनाना

विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों के कौशल को मजबूत कर उन्हें आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध कराना है. जरूरत है कि प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता के साथ कारीगरों को बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री से भी जोड़ा जाए, ताकि उनका हुनर सिर्फ पुश्तैनी काम तक सीमित न रहे, बल्कि टिकाऊ कारोबार में बदल सके.

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By खुशबू कुमारी

खुशबू कुमारी पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज, से मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया है तथा वर्तमान में इग्नू से मास्टर ऑफ आर्ट्स (मास कम्युनिकेशन एंड डिजिटल मीडिया) की पढ़ाई कर रही हैं. उन्हें जनहित से जुड़ी खबरों, डिजिटल पत्रकारिता, समाचार लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक डिजाइन में विशेष रुचि है. वे राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर शोधपरक, तथ्यपरक और पाठकों के लिए उपयोगी डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं. उनका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, स्पष्ट और प्रभावी जानकारी पहुंचाना है, ताकि समाचार केवल सूचना का माध्यम न होकर समाज के लिए उपयोगी साबित हों.

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