UP News: उत्तर प्रदेश खुद को देश के अगले टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकार वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के साथ AI सिटी, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बड़ा दांव लगा रही है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि असली सफलता तभी होगी जब निवेश बड़े पैमाने पर रोजगार और स्थानीय युवाओं के अवसरों में बदले.
AI सिटी और डेटा सेंटर पर सरकार का बड़ा दांव
सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश देश के 65 फीसदी मोबाइल निर्माण में योगदान दे रहा है और अब राज्य में 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है. इसके साथ AI, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है.
रोजगार सबसे बड़ी परीक्षा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में जहां बेरोजगारी दर 5.5 फीसदी थी, वहीं 2023-24 में यह करीब 3 फीसदी तक पहुंची है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बेरोजगारी दर कम होना पर्याप्त नहीं है. असली सवाल यह है कि युवाओं को कितनी स्थायी, बेहतर वेतन वाली और गुणवत्तापूर्ण नौकरियां मिल रही है.
MSME और टेक्सटाइल से छोटे शहरों को उम्मीद
सरकार ने 2026-27 के बजट में टेक्सटाइल और हैंडलूम क्षेत्र के लिए करीब 5,041 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है और 30 हजार नए रोजगार का लक्ष्य रखा है. साथ ही MSME और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर गांवों और छोटे शहरों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है.
क्या बेंगलुरु जैसी पहचान बना पाएगा यूपी?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इमारतें, एक्सप्रेसवे और डेटा सेंटर किसी राज्य को टेक हब नहीं बनाते. इसके लिए मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम, आसान फंडिंग, स्किल्ड टैलेंट और पलायन रोकने वाले रोजगार की जरूरत होगी. फिलहाल उत्तर प्रदेश ने मजबूत शुरुआत की है, लेकिन बेंगलुरु और हैदराबाद जैसी वैश्विक पहचान बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है.
