UP News : ऑनलाइन गेमिंग के बढ़ते चलन के बीच बच्चों को मोबाइल देना माता-पिता के लिए बड़ी जिम्मेदारी बन गया है. गेम खेलते समय की गई एक छोटी सी लापरवाही परिवार को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा सकती है. ग्रेटर नोएडा में ऑनलाइन गेमिंग के चक्कर में एक परिवार के करीब 29 लाख रुपये गंवाने का मामला सामने आया है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रोफेसर आरबी सिंह ने अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल और गेमिंग ऐप को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. आज के दौर में मोबाइल बच्चों की पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक का अहम हिस्सा बन चुका है. ऑनलाइन क्लास, होमवर्क और गेमिंग के लिए बच्चे घंटों स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को मोबाइल देने के साथ-साथ उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर रखें.
गेमिंग ऐप के जरिए कैसे हो सकता है नुकसान?
प्रोफेसर आरबी सिंह के मुताबिक इंटरनेट पर मौजूद कई गेमिंग ऐप पहली नजर में सामान्य और मनोरंजक दिखाई देते हैं. बच्चे इन्हें आसानी से डाउनलोड कर लेते हैं, लेकिन कई ऐप इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल में अलग-अलग तरह की परमिशन मांगते हैं. अगर बच्चा बिना समझे कैमरा, कॉन्टैक्ट, स्टोरेज या दूसरी परमिशन दे देता है तो निजी जानकारी जोखिम में पड़ सकती है. खासकर उस मोबाइल में अधिक सतर्कता जरूरी है, जिसमें बैंकिंग ऐप, UPI, डेबिट या क्रेडिट कार्ड जैसी भुगतान सुविधाएं जुड़ी हों. माता-पिता को बच्चों को समझाना चाहिए कि कोई भी गेम डाउनलोड करने, इन-ऐप खरीदारी करने या किसी ऐप को परमिशन देने से पहले उनसे जरूर पूछें.
छोटे-छोटे पेमेंट से धीरे-धीरे हो सकता है बड़ा नुकसान
साइबर ठगी करने वाले हमेशा एक ही बार में बड़ी रकम निकालें, यह जरूरी नहीं है. कई मामलों में छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन के जरिए धीरे-धीरे पैसे निकाले जा सकते हैं. गेम में अगले लेवल, डिजिटल कॉइन, नए कैरेक्टर, हथियार या दूसरे फीचर का लालच देकर बच्चों से बार-बार भुगतान कराया जा सकता है. अगर परिवार बैंक खाते के ट्रांजेक्शन पर नजर नहीं रखता है तो कई दिनों तक इस तरह के भुगतान का पता नहीं चलता. ऐसे में कुछ ही दिनों में खाते से बड़ी रकम निकल सकती है और परिवार को इसकी जानकारी तब होती है, जब नुकसान काफी बढ़ चुका होता है.
सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं, बच्चे की सुरक्षा भी खतरे में
ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा खतरा केवल पैसों तक सीमित नहीं है. गलती का पता चलने के बाद बच्चा डरकर माता-पिता से बात छिपा सकता है. ऐसी स्थिति में साइबर अपराधी बच्चे को डराने या ब्लैकमेल करने की कोशिश भी कर सकते हैं. इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार रखना चाहिए कि वे किसी भी ऑनलाइन परेशानी के बारे में बिना डरे तुरंत जानकारी दे सकें. बच्चे से गलती होने पर उसे डांटने के बजाय समस्या को समझना और समय रहते जरूरी कदम उठाना ज्यादा महत्वपूर्ण है.
मोबाइल देना जरूरी है तो निगरानी भी रखें
स्कूल, कोचिंग और पढ़ाई के लिए बच्चों को मोबाइल देना आज कई परिवारों की जरूरत बन गया है. लेकिन मोबाइल देने का मतलब यह नहीं कि बच्चे को पूरी तरह बिना निगरानी के छोड़ दिया जाए. बच्चों को शुरुआत से ही समझाएं कि मोबाइल में परिवार की निजी जानकारी, फोटो, बैंकिंग और भुगतान से जुड़ी सुविधाएं हो सकती हैं. इसलिए कोई नया गेम या ऐप अपनी मर्जी से डाउनलोड नहीं करना है. अगर किसी गेम या ऐप में पैसे खर्च करने का विकल्प आए तो पहले माता-पिता को इसकी जानकारी देनी चाहिए.
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए बच्चों को ये बातें जरूर बताएं
OTP कभी किसी से शेयर न करें
बच्चों को साफ तौर पर समझाएं कि बैंक या किसी अन्य सेवा से आया OTP किसी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना है. फोन पर कोई खुद को बैंक अधिकारी या किसी कंपनी का कर्मचारी बताकर OTP मांगे तो भी उसे जानकारी नहीं देनी चाहिए.
अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर आए किसी संदिग्ध लिंक को बिना जांचे नहीं खोलना चाहिए. अनजान लिंक के जरिए फर्जी वेबसाइट या धोखाधड़ी वाले पेज तक पहुंचाया जा सकता है.
बिना पूछे गेम या ऐप डाउनलोड न करें
बच्चों की आदत बनाएं कि कोई नया गेम या ऐप डाउनलोड करने से पहले माता-पिता को इसकी जानकारी दें. खासकर ऐसे ऐप से बचें, जो अनावश्यक रूप से कई तरह की परमिशन मांगते हों.
ऐप की परमिशन ध्यान से देखें
किसी गेम या ऐप को कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट, लोकेशन या स्टोरेज की परमिशन देने से पहले यह जरूर देखें कि उस ऐप को वास्तव में इसकी जरूरत है या नहीं.
बैंक खाते पर रखें नजर
माता-पिता को नियमित रूप से बैंक खाते और UPI से होने वाले लेनदेन की जांच करनी चाहिए. कोई अनजान या संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई दे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें.
पैरेंटल कंट्रोल का करें इस्तेमाल
बच्चों के मोबाइल में उम्र के हिसाब से पैरेंटल कंट्रोल लगाया जा सकता है. इससे ऐप डाउनलोड, स्क्रीन टाइम और इन-ऐप खरीदारी जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है.
बच्चे को गलती पर डराएं नहीं
अगर बच्चे से गलती से कोई पेमेंट हो जाए या वह किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर दे तो उसे डांटने के बजाय तुरंत बताने के लिए प्रोत्साहित करें. समय पर जानकारी मिलने से नुकसान को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है.
ब्लैकमेल होने पर तुरंत बताएं
अगर कोई ऑनलाइन धमकी देता है या ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है तो बच्चे को अकेले इससे निपटने के लिए न छोड़ें. ऐसी स्थिति में माता-पिता को तुरंत जानकारी देकर उचित मदद लेनी चाहिए.
बच्चों को मोबाइल दें, लेकिन डिजिटल सुरक्षा की आदत भी सिखाएं
ऑनलाइन पढ़ाई और मनोरंजन के लिए मोबाइल आज बच्चों की जरूरत बन चुका है. ऐसे में मोबाइल पूरी तरह छीन लेना हमेशा व्यावहारिक समाधान नहीं है. बेहतर तरीका यह है कि बच्चों को कम उम्र से ही डिजिटल सुरक्षा के नियम समझाए जाएं. माता-पिता बच्चों को यह भरोसा दिलाएं कि ऑनलाइन दुनिया में कोई भी गलती होने पर वे बिना डर के परिवार को बता सकते हैं. सतर्कता, नियमित बैंकिंग जांच और पैरेंटल कंट्रोल जैसी सावधानियां साइबर फ्रॉड के जोखिम को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती हैं.
Also read : आरक्षण दो, वरना सरकार जाएगी... अपनी ही सरकार के खिलाफ संजय निषाद का मोर्चा, 2027 से पहले NDA में बढ़ी हलचल
