UP News: लखनऊ नगर निगम की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया. भाजपा के 32 पार्षदों ने महापौर सुषमा खर्कवाल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात की. पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए बजट आवंटन में भेदभाव किया गया है, जिससे कई वार्डों के विकास कार्य प्रभावित हुए हैं.
दस्तावेजों के साथ सौंपी शिकायत
वरिष्ठ पार्षद देव शर्मा मिश्रा उर्फ मुन्ना मिश्रा के नेतृत्व में पहुंचे पार्षदों ने प्रदेश अध्यक्ष को दस्तावेजों के साथ शिकायत सौंपी. उनका कहना था कि जिन जनप्रतिनिधियों से महापौर की राजनीतिक सहमति नहीं है, उनके वार्डों में विकास कार्यों के लिए बजट तक जारी नहीं किया गया. प्रतिनिधिमंडल में कई पार्षदों और कार्यकारिणी सदस्यों ने अपने-अपने वार्डों से जुड़े विकास कार्यों और बजट आवंटन का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया.
बजट आवंटन पर उठाए सवाल
पार्षद मुकेश सिंह मोंटी ने दावा किया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र के 88 वार्डों के विकास के लिए केवल 18 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जबकि समाजवादी पार्टी के सांसद आर.के. चौधरी के मोहनलालगंज क्षेत्र के 22 वार्डों में 32 करोड़ रुपये के विकास कार्य मंजूर किए गए. पार्षदों का आरोप है कि महापौर ने अपनी पसंद के पार्षदों के वार्डों में अधिक विकास कार्य स्वीकृत किए, जबकि अन्य वार्डों को 15वें वित्त आयोग और अवस्थापना निधि से मिलने वाली राशि से वंचित रखा गया.
प्रदेश अध्यक्ष का भरोसा, महापौर ने दी प्रतिक्रिया
पार्षदों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी वार्ड के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा तथा विकास कार्यों के लिए बजट का समान रूप से आवंटन सुनिश्चित कराया जाएगा. वहीं, महापौर सुषमा खर्कवाल ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलहाल उन्हें इस विषय पर कुछ नहीं कहना है. उन्होंने कहा कि जब उनसे रिपोर्ट मांगी जाएगी, तब वह अपना पक्ष रखेंगी. महापौर का दावा है कि सभी क्षेत्रों में विकास कार्य कराए गए हैं.
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