UP Flood: उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है. प्रदेश के 37 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि 25 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. प्रशासन ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान जारी रखा है. अब तक 19,454 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है.
25 जिलों में अब भी बाढ़ का पानी
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी समेत 25 जिलों में बाढ़ का असर बना हुआ है.
3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं
इससे पहले जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार 26 जिलों में करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे. 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था और करीब 4,847 लोग राहत शिविरों में रह रहे थे. बलिया में गंगा और घाघरा के बढ़े जलस्तर से 48 गांव प्रभावित हुए थे.
2 हजार से ज्यादा नावें राहत में जुटीं
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए 2,075 नाव और मोटरबोट लगायी गयी हैं. प्रशासन ने 1,315 बाढ़ राहत शिविर तैयार किए हैं. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,072 मेडिकल टीमें भी तैनात की गयी हैं.
कानपुर में 40 हजार लोगों पर बाढ़ का असर
कानपुर और कानपुर देहात में पांडु नदी के उफान ने भी गंभीर स्थिति पैदा की है. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 हजार लोग प्रभावित हुए हैं और 1,000 से अधिक मकान पानी की चपेट में आए हैं. कई स्थानों पर घरों में करीब छह फीट तक पानी पहुंचने की सूचना है.
गंगा फिर बढ़ा रही चिंता
कानपुर में गंगा का जलस्तर बैराज पर चेतावनी स्तर पार कर चुका है. मंगलवार को बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 114.41 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का निशान 115 मीटर है. ऊपरी बैराजों से करीब 5.44 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है. इससे कटरी क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है.
नदियां उफान पर, गांवों में दहशत
लखीमपुर खीरी में शारदा, घाघरा और मोहाना के उफान से एक दर्जन से ज्यादा गांव जलमग्न हुए हैं. कई जगह सड़कें करीब दो फीट तक पानी में डूब गयी हैं और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. यूपी में बाढ़ की तस्वीर लगातार बदल रही है. नदियों का जलस्तर, बांधों से पानी छोड़े जाने और स्थानीय बारिश के कारण निचले इलाकों में खतरा बना हुआ है. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है.
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