UP News: उत्तर प्रदेश में कस्टोडियन भूमि यानी शत्रु संपत्ति का एक महाघोटाला सामने आया है, इस घोटाले की सबसे चौंकाने वाली कड़ी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम जैसी शत्रु संपत्तियों से जुड़ी है. 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की हजारों करोड़ की जमीन, जिसमें दाऊद इब्राहिम जैसे परिवारों की संपत्तियां भी शत्रु संपत्ति घोषित हैं, आज यूपी में भू-माफियाओं की अवैध कमाई का जरिया बन गई हैं.
प्रदेश भर में फैला है अवैध कब्जे का साम्राज्य
शुरुआती जांच शाहजहांपुर में सैकड़ों बीघा कस्टोडियन जमीन पर कब्जे से शुरू हुई, लेकिन इसके तार पूरे प्रदेश से जुड़ रहे हैं. लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों में नगरीय क्षेत्र की करोड़ों की शत्रु संपत्ति पर रसूखदारों ने कब्जा जमा रखा है. इन जमीनों पर कहीं गेहूं-धान की फसल लहलहा रही है, तो कहीं आलीशान गोदाम, दुकानें और मार्केट कॉम्प्लेक्स बनाकर हर महीने लाखों का किराया वसूला जा रहा है. यह पूरा पैसा सीधे भू-माफियाओं की जेब में जा रहा है, जबकि सरकारी खजाना खाली है.
दाऊद एंगल क्या है?
दरअसल, केंद्र सरकार के कस्टोडियन विभाग के मुताबिक शत्रु संपत्ति में वो सभी संपत्तियां आती हैं, जो 1947 और 1965 के युद्ध के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की थीं. इसमें कई ऐसी संपत्तियां भी हैं, जिनके वारिस बाद में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम जैसे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे. ऐसी संपत्तियों को सरकार ने विशेष श्रेणी में रखा है, लेकिन यूपी में इनकी सुरक्षा भगवान भरोसे है. सूत्रों का दावा है कि ऐसी कई हाई-प्रोफाइल शत्रु संपत्तियों पर भी स्थानीय माफियाओं ने कब्जा कर रखा है.
बिना मिलीभगत के नहीं हो सकता कब्जा
स्थानीय लोगों का साफ आरोप है कि कस्टोडियन विभाग और राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना सैकड़ों बीघा जमीन पर सालों तक कब्जा बनाए रखना मुमकिन नहीं है. कागजों में आज भी जमीन भारत सरकार की है, लेकिन मौके पर न तो कोई बोर्ड है, न कोई सुरक्षा.
योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस पर सवाल
योगी सरकार लगातार भू-माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन शत्रु संपत्ति पर हो रही यह खुली लूट उन दावों की पोल खोल रही है. जिला प्रशासन से लेकर कस्टोडियन विभाग तक इस पर चुप्पी साधे हुए है.
कस्टोडियन टीम करती है जमीन का सत्यापन
सर्किल लेखपाल बृजेंद्र सिंह ने कहा कि, कस्टोडियन विभाग की टीम लखनऊ से तहसील पहुंचती है और राजस्व विभाग से संपर्क कर संबंधित जमीनों की गाटा संख्या की जानकारी जुटाती है. इसके बाद टीम के अधिकारी वापस लौट जाते हैं. उन्होंने बताया कि कस्टोडियन विभाग की जिम्मेदारी इन जमीनों की देखरेख की है. तिलहर तहसील के खंडसार गांव और आसपास करीब 1200 बीघा जमीन बताई जा रही है, जिस पर कहीं बाजार और मकान बने हैं तो कहीं कृषि कार्य किया जा रहा है.
अब क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
इस घोटाले के बाद सामाजिक संगठनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि -
- दाऊद इब्राहिम सहित सभी शत्रु संपत्तियों का प्रदेशव्यापी ड्रोन सर्वे और भौतिक सत्यापन हो.
- सभी अवैध कब्जों को तत्काल हटाकर जमीन पर केंद्र सरकार का बोर्ड लगाया जाए.
- अवैध कब्जाधारकों पर NSA और गैंगस्टर एक्ट के तहत FIR दर्ज कर अब तक की अवैध कमाई की वसूली हो.
- दशकों से इस लूट को अनदेखा करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. शाहजहांपुर से राजेश तोमर की रिपोर्ट
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