UP Politics: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है. अमित शाह ने मुंबई में कहा कि 2029 से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा. इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों और जरूरत को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
अखिलेश यादव ने दिया UCC का नया मतलब
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमित शाह के बयान पर निशाना साधा. उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए UCC को ‘Underground Communal Conspiracy’ बताया. अखिलेश ने कहा कि सरकार को नया कानून लाने से पहले अपने पुराने वादों पर ध्यान देना चाहिए.
रोजगार से महिला सुरक्षा तक उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में रोजगार, युवाओं और महिला सुरक्षा समेत कई मुद्दों का जिक्र किया. उन्होंने 15 लाख रुपये खाते में आने, दो करोड़ नौकरियां देने और युवाओं को रोजगार जैसे पुराने वादों को याद दिलाते हुए कहा कि पहले किए गए वादों को पूरा किया जाना चाहिए. उनका संदेश था कि ‘पहले पिछले वादे निभाओ, UCC फिर बाद में लाओ.’
ओवैसी ने संविधान की धाराओं का दिया हवाला
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी UCC को लेकर विरोध जताया. भोपाल में उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित कानून संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14 और 29 से जुड़े अधिकारों के खिलाफ होगा. ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता को खत्म करके ऐसा कानून लागू नहीं किया जा सकता.
BJP ने साफ किया अपना रुख
विपक्ष के विरोध के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने UCC को लेकर बीजेपी का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता बीजेपी के घोषणा पत्र और संकल्प पत्र का हिस्सा है और यह पार्टी की प्रतिबद्धता है. उनके मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह ने जो बात कही है, वह बीजेपी की नीति के अनुरूप है.
UP में जल्द लागू होने के संकेत
भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी UCC जल्द लागू हो सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस संबंध में कोई फैसला जरूर लेंगे. विपक्ष की आपत्तियों पर उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करती रही है और UCC भी उसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है. इससे साफ है कि यूपी में UCC आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है.
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