जातीय जनगणना पर छिड़ा घमासान: प्रयागराज में केंद्र सरकार पर गरजे पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल,आर-पार के आंदोलन की दी चेतावनी

UP Congress News: जातीय जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. पार्टी का कहना है कि आधी-अधूरी गणना स्वीकार नहीं की जाएगी. सामाजिक न्याय के लिए पारदर्शी आंकड़े जरूरी हैं, जिसके अभाव में पिछड़ों और वंचितों का हक मारा जा रहा है.

UP Congress News: जातीय जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया है. प्रयागराज पहुंचे कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने प्रेस वार्ता में सरकार की नीतियों और नीयत पर गहरे सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सटीक जनसंख्या आंकड़े दबाकर पिछड़ों और वंचितों की हकमारी कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आधी-अधूरी गणना किसी कीमत पर मंजूर नहीं होगी.

सामाजिक न्याय के लिए पारदर्शी आंकड़े जरूरी

कमलेश्वर पटेल ने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे वर्ष 2023 से लगातार सामाजिक न्याय की मांग उठा रहे हैं. देश में सही नीतियां बनाने, प्रशासनिक व संवैधानिक पदों पर उचित भागीदारी सुनिश्चित करने और आर्थिक तरक्की के लिए पारदर्शी जातीय गणना आवश्यक है. उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' और लगातार बने जनदबाव के कारण ही सरकार को वर्ष 2025 में जनगणना की अधिसूचना जारी करने के लिए विवश होना पड़ा.

दोहरी राजनीति और तेलंगाना मॉडल की मांग

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि घोषणा के बावजूद सरकार इसके मूल स्वरूप को लागू करने से बच रही है. सत्तापक्ष केवल धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटकर वोट हथियाना चाहता है, लेकिन जब वंचितों को अधिकार देने की बात आती है तो कदम पीछे खींच लेता है. उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार पूरे देश में तेलंगाना की तर्ज पर वैज्ञानिक तरीके से पारदर्शी गणना कराए.

मांगें पूरी न होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

कमलेश्वर पटेल ने बताया कि तेलंगाना में 3 करोड़ 55 लाख नागरिकों की कराई गई वैज्ञानिक गणना की रिपोर्ट के साथ कांग्रेस नेतृत्व ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर पार्टी राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगी. जिस तरह अनुसूचित जाति-जनजाति के आंकड़े विधिवत जुटाए जाते हैं, उसी तरह ओबीसी, सामान्य वर्ग के गरीबों, अल्पसंख्यकों और अन्य समुदायों की सटीक जानकारी एकत्र की जाए. पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए जाने तक यह संघर्ष जारी रहेगा.

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By शशांक शेखर मिश्रा

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