अमेठी के गौरीगंज में एक ऐसी जगह है, जहां आस्था और इतिहास का अनोखा संगम देखने को मिलता है. जंगल के बीच बसे इस हनुमान धाम में मंगलवार को कदम रखते ही माहौल पूरी तरह बदल जाता है. चारों तरफ भक्तों की भीड़, मंदिर में गूंजते जयकारे और जगह-जगह नजर आते बंदर इस स्थान को बाकी मंदिरों से अलग बनाते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद बजरंगबली पूरी करते हैं.
56 फुट की विशाल प्रतिमा
गौरीगंज का उल्टा गढ़ा हनुमान मंदिर करीब 200 साल पुराने इतिहास से जुड़ा बताया जाता है. मंदिर परिसर में स्थापित 56 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा यहां आने वाले लोगों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है. दूर से ही दिखाई देने वाली यह विशाल प्रतिमा भक्तों को अपनी ओर खींच लाती है. मंगलवार के दिन यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है और परिसर में मेले जैसा माहौल नजर आता है.
पुराने किले से जुड़ा इतिहास
इस जगह का इतिहास एक पुराने किले से भी जुड़ा हुआ बताया जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार करीब दो शताब्दी पहले यहां एक राजा का शासन था. कहा जाता है कि भूकंप के कारण किले को भारी नुकसान पहुंचा और उसका ढांचा पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया. इसी घटना के बाद इस स्थान को उल्टा गढ़ा कहा जाने लगा. पुराने किले के अवशेष और मेहराब से जुड़ी जानकारी समय-समय पर प्रशासन और पुरातत्व विभाग तक भी पहुंचाई गई है.
2007 में रखी गई आधारशिला
समय के साथ इस ऐतिहासिक स्थान की पहचान एक बड़े धार्मिक स्थल के रूप में होती चली गई. मंदिर की आधारशिला 2 जून 2007 को रखे जाने की जानकारी मिलती है. इसके करीब दो साल बाद 9 जून 2009 को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई. इसके बाद परिसर का लगातार विस्तार होता रहा और यहां अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिर भी बनाए गए.
मंदिर में क्यों आते हैं हजारों बंदर?
इस मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद बंदरों की बड़ी संख्या भी है. मंदिर परिसर और आसपास के जंगल में बड़ी संख्या में बंदर दिखाई देते हैं. भक्त इन्हें बजरंगबली का स्वरूप मानकर चना, गुड़, पूरी और लड्डू खिलाते हैं. कई श्रद्धालु मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और इच्छा पूरी होने के बाद प्रसाद चढ़ाकर धन्यवाद करते हैं.
मंगलवार को लगता है मेला
हर मंगलवार को यहां लगने वाला मेला इस धार्मिक स्थल की रौनक और बढ़ा देता है. आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी लोग यहां पहुंचते हैं. कोई पूजा-अर्चना करने आता है तो कोई अपनी मनोकामना लेकर माथा टेकता है. मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.
पर्यटन स्थल बनाने की मांग
स्थानीय लोगों की लंबे समय से मांग है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुख स्थान मिले. उनका मानना है कि अगर यहां बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएं तो धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह जगह पर्यटन के लिहाज से भी बड़ी पहचान बना सकती है.
इतिहास, आस्था और प्रकृति का मेल
कुल मिलाकर उल्टा गढ़ा हनुमान धाम में इतिहास की परतें, धार्मिक आस्था और प्रकृति का अनोखा मेल दिखाई देता है. 200 साल पुराने इतिहास से जुड़ी कहानियां, 56 फुट की विशाल प्रतिमा और मंदिर परिसर में घूमते बंदर इस जगह को खास बनाते हैं. यही वजह है कि मंगलवार आते ही यहां भक्तों का तांता लग जाता है और पूरा परिसर बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठता है.
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