Teacher Recruitment Case: उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 8 सितंबर 2026 दिन मंगलवार को अंतिम बहस हुई. सुनवाई न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष हुई. मामले में अलग-अलग पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं. सुनवाई के दौरान वर्तमान में कार्यरत चयनित शिक्षकों की ओर से पेश वकील ने उन्हें सेवा से हटाए जाने का विरोध किया. उनका तर्क था कि ये शिक्षक करीब छह वर्षों से नौकरी कर रहे हैं. यदि भर्ती प्रक्रिया में कोई गलती हुई भी है तो इसमें कार्यरत शिक्षकों की भूमिका नहीं है. ऐसे में उन्हें नौकरी से हटाना उचित नहीं होगा.
सरकार ने भी कहा- चयनित शिक्षकों को हटाने के पक्ष में नहीं
राज्य सरकार की ओर से भी कोर्ट में यह रुख रखा गया कि वह पहले से नियुक्त चयनित शिक्षकों को हटाने के पक्ष में नहीं है. सरकार ने इस स्थिति में अदालत के सामने यह सवाल रखा कि यदि चयनित शिक्षकों को सेवा से नहीं हटाया जाता है तो उन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय कैसे मिलेगा, जो भर्ती में आरक्षण से प्रभावित हुए हैं और लंबे समय से अदालत में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. इस मामले में अदालत के सामने मुख्य चुनौती यह है कि एक ओर वर्तमान में नौकरी कर रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा हो और दूसरी ओर आरक्षण में कथित गड़बड़ी से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके.
EWS आरक्षण का मुद्दा भी उठा
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS आरक्षण का मुद्दा भी पीठ के सामने आया. राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 69,000 शिक्षक भर्ती में EWS को लेकर कोई विवाद नहीं है और इस संबंध में हाईकोर्ट पहले ही मामले पर विचार कर चुका है.
8,270 अभ्यर्थियों से जुड़ा डाटा भी अहम
इस मामले में राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष संशोधित डाटा और 8,270 अभ्यर्थियों से संबंधित जानकारी पेश की थी. उपलब्ध विवरण के अनुसार संशोधित सूची में उन अभ्यर्थियों को भी शामिल किया गया है जो पहले चयनित होने के बावजूद नियुक्ति नहीं पा सके थे. सरकार की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों में नई कटऑफ सामान्य वर्ग के लिए 69.46, OBC के लिए 65.92, SC के लिए 60.14 और ST के लिए 56.09 बताई गई थी. सरकार ने यह भी कहा था कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को प्रभावित किए बिना समायोजन का रास्ता निकाला जा सकता है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से ऐसा हलफनामा भी सामने आया था, जिसमें मौजूदा शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रखने और पात्र अभ्यर्थियों को अवसर देने की बात कही गई थी.
छह साल से जारी है विवाद
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी और 2020 में नियुक्तियां हुई थीं. इसके बाद भर्ती में आरक्षण और मेरिट को लेकर विवाद न्यायालय पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नई मूल चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की अंतिम बहस के दौरान अलग-अलग पक्ष अपने तर्क रख रहे हैं. अदालत का अंतिम फैसला आने तक यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा शिक्षकों और आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थियों के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाएगा. इसलिए अभी किसी शिक्षक की नौकरी जाने या किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति होने को अंतिम रूप से तय मानना सही नहीं होगा.
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