सोनभद्र में ‘लैंड जिहाद’ के दावे ने पकड़ा कानूनी मोड़, आदिवासी जमीन विवाद पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, जानें 3 याचिकाओं का क्या हुआ

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की जमीन खरीद मामले में तीन याचिकाएं खारिज कर दीं. अदालत ने डिप्टी कलेक्टर के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का निर्देश दिया गया था. प्रशासन अब जन उपयोगी निर्माण की योजना पर काम करेगा.

UP News: सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति से जुड़ी जमीनों के बैनामे रद्द करने के जिला प्रशासन के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है. प्रशासन के मुताबिक, बघाड़ू गांव में रजिया उर्फ नन्हकी के नाम पर कराए गए कई भूमि बैनामों को जांच के बाद शून्य घोषित किया गया था. इसके बाद 40 गाटों में शामिल करीब 5.7142 हेक्टेयर भूमि को ग्राम सभा में निहित कर दिया गया. रजिया ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.

निकाह और पहचान से जुड़ा विवाद, जमीन खरीद पर उठे सवाल

जिला प्रशासन का आरोप है कि बहादुर अली ने रजिया से निकाह के बाद दस्तावेजों में उसकी पुरानी पहचान का इस्तेमाल करते हुए अनुसूचित जनजाति की जमीनों की खरीद की. प्रशासन के अनुसार, इस तरह 30 से अधिक जमीनों के बैनामे कराए गए. बाद में इनमें से कुछ जमीनें झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में रहने वाले रिश्तेदारों के नाम किए जाने की बात भी सामने आई. प्रशासन ने जांच के बाद संबंधित बैनामों को कानूनन शून्य मानते हुए जमीन ग्राम सभा में निहित करने की कार्रवाई की.

'लैंड जिहाद' के आरोपों के बीच प्रशासन ने बताया बड़ा मामला

जिला प्रशासन ने इस प्रकरण को आदिवासी जमीनों पर कथित अवैध कब्जे और दस्तावेजी हेरफेर से जोड़ते हुए 'लैंड जिहाद' के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश किया है. हालांकि, 'लैंड जिहाद' एक राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में इस्तेमाल होने वाला आरोप/शब्द है, जबकि इस मामले में अदालत के सामने मुख्य सवाल भूमि हस्तांतरण की वैधता और अनुसूचित जनजाति से जुड़े कानूनी संरक्षण का था. प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य आदिवासी समाज की संरक्षित जमीनों को अवैध हस्तांतरण से बचाना है.

रजिया जनजातीय परंपरा से जुड़ाव का ठोस प्रमाण नहीं दे सकीं

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रजिया की ओर से अपने मूल जनजातीय समुदाय और उसकी परंपराओं से निरंतर जुड़ाव के संबंध में पेश किए गए आधारों पर विचार किया. अदालत के अनुसार, लंबे समय तक दूसरे धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन बिताने तथा मूल समुदाय से जुड़ाव खत्म होने की स्थिति में अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दावा स्वतः नहीं किया जा सकता. अदालत के मुताबिक, याची ऐसा ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं जिससे मुस्लिम रीति से विवाह और लंबे समय तक अलग पहचान के बावजूद पनिका जनजाति की परंपराओं से उनका निरंतर संबंध साबित हो.

पांच महीने से कम समय में हाईकोर्ट में हुआ फैसला

जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, अप्रैल में रजिया ने प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामले में न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ ने जिला प्रशासन द्वारा बैनामों को शून्य घोषित करने और जमीन को ग्राम सभा में निहित करने की कार्रवाई में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत मामले में प्रभावी पैरवी की गई, जिसके बाद पांच महीने से कम अवधि में अदालत का फैसला सामने आया.

अब जमीन पर बनेगा खेल मैदान, बरात घर और बिरसा मुंडा की प्रतिमा

हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने ग्राम सभा में निहित जमीन के इस्तेमाल की तैयारी शुरू कर दी है. जिलाधिकारी के मुताबिक, क्षेत्र के बच्चों के लिए खेल मैदान और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए बरात घर बनाया जाएगा. इसके साथ ही समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की भी तैयारी है. बची हुई जमीन पर जरूरत के अनुसार शासकीय भवनों के निर्माण की योजना है. प्रशासन का कहना है कि जमीन का इस्तेमाल अब स्थानीय लोगों के लिए जन उपयोगी सुविधाएं विकसित करने में किया जाएगा.

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By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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