12 बजे तक सोने वालों को गरीबों की चिंता नहीं, बोले सीएम योगी

Scholarship in UP: छात्रवृत्ति वितरण समारोह में यूपी के सीएम योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला किया. उन्होंने डीबीटी से 18.78 लाख छात्रों को ₹944.55 करोड़ की छात्रवृत्ति दी.

Scholarship in UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो 12 बजे तक सोकर उठते हों, उन्हें गरीबों के बच्चों की पढ़ाई की चिंता कैसे हो सकती है? जो सूरज निकलने के बाद उठे, उसे सूर्योदय की बात भी फिजूल लगेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में परिवारवाद, भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते छात्रवृत्ति जैसी कल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद छात्रों तक नहीं पहुंच पाती थीं. इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 18,78,726 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में ₹944.55 करोड़ की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं भी दीं.

डीबीटी से टूटी भ्रष्टाचार की जंजीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छात्रवृत्ति योजनाएं बिचौलियों और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ जाती थीं. कभी नीयत में खोट होता था, कभी परिवारवाद आड़े आता था और कभी विभागीय भ्रष्टाचार गरीब छात्रों का हक खा जाता था. उन्होंने कहा, “आज एक क्लिक में बिना भेदभाव, बिना सिफारिश और बिना रिश्वत के करीब 19 लाख छात्रों के खातों में पैसा पहुंचा है. यही सुशासन है.” गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सामाजिक न्याय का संदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर छात्रवृत्ति का यह वितरण सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना को मजबूत करता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वंचित को वरीयता, पिछड़ों को प्राथमिकता” के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे. उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से ई-गवर्नेंस को ईज़ी गवर्नेंस में बदला गया है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों बढ़े हैं.

छात्रवृत्ति से बदली जिंदगियां

मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति से लाभान्वित छात्रों की सफलता की कहानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजनाएं केवल सहायता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का माध्यम हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम में कंप्यूटर सहायक बनी एक छात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि बेटियों का स्वावलंबी बनना सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

शिक्षा ढांचे में ऐतिहासिक सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदली गई है. विद्यालयों में अब बेहतर भवन, शिक्षक, डिजिटल सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध है. उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री-प्राइमरी शिक्षा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय, मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट स्कूल और अभ्युदय कोचिंग योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत नीट, जेईई और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार स्किल डेवलपमेंट, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है.

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के माध्यम से करोड़ों जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाया गया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह सब ‘परिवार प्रथम’ नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से संभव हुआ है.”

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी तथा एससी/एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे.

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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